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Jaya Ekadashi: कल है जया एकादशी, जानिये शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताएं

Jaya Ekadashi: जया एकादशी पर इस तरह करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें कब है शुभ मुहूर्त और कैसे करनी है पूजा।

Jaya Ekadashi, Jaya Ekadashi kab hai, Jaya Ekadashi Vrat, Ekadashi Vrat, Ekadashi Vrat Kathaमाघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। इस बार ये तिथि 23 फरवरी को पड़ रही है

Jaya Ekadashi: हिंदू मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत-उपवास कर अपने आराध्य की पूजा करता है, उसे काफी लाभ होता है। इस व्रत को करने वालों को श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। इस व्रत को सभी व्रतों में उत्तम माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी के दिन पूजा और व्रत आदि करने से पिशाच अथवा भूत-प्रेत की योनि से भी भक्तों को मुक्ति मिल जाती है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ जया एकादशी का व्रत रखता है, उसकी भगवान विष्णु के आशीर्वाद से सभी परेशानियां और कष्ट दूर हो जाते हैं। इस साल 23 फरवरी यानी कल जया एकादशी है।

शुभ मुहूर्त: जया एकादशी की तिथि 22 फरवरी सोमवार शाम 5:16 से शुरू हो जाएगी, मंगलवार यानी 23 फरवरी के दिन शाम 6:05 पर तिथि का समापन होगा।

पूजा विधि: जया एकादशी तिथि के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत संकल्प करना चाहिए। उसके बाद उनकी पूजा करनी चाहिए। पूजा में धूप, दीप, चंदन, फल, तिल और पंचामृत आदि से भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहिए। पूरे दिन मन में भगवान विष्णु के नाम का जाप करना चाहिए। हालांकि, रात के समय फलाहार करके आप अपना व्रत खोल सकते हैं। वहीं, द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन आदि कराने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

जया एकादशी व्रत कथा का महात्मय: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से पूछते हैं कि माघ शुक्ला एकादशी पर किस देवता को पूजना चाहिए और इसका क्या महात्मय है। इसका जवाब देते हुए श्रीकृष्ण कथा का वर्णन करते हैं। वह बताते हैं कि माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है, साथ ही इस व्रत को करने से नीच योनि वाले व्यक्ति जैसे- भूत-प्रेत और पिशाच की योनि से मुक्ति मिल जाती है।

 

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