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ज्ञान सागर: समस्याएं समय के साथ हो जाती हैं हल

समस्याएं सहजात होती हैं यानी कि जन्म के साथ ही आती हैं। इनसानी जीवन समस्याओं को लेकर हमेशा बिखरा हुआ रहता है।

Author Updated: February 15, 2021 6:02 AM
humanइनसानी जीवन समस्याओं को लेकर हमेशा बिखरा हुआ रहता है।

नरपत दान चारण

हर कोई चाहता है कि उसके जीवन में कोई समस्या हो ही नहीं। वहीं, कहीं एक समस्या समाप्त हो भी जाती है, तो दूसरी शुरू हो जाती है। यानी समस्याओं का सिलसिला जीवन के समानानतर सतत रूप में चलता रहता है। जब समस्या का सामना करने की बात आती है, तो सवाल यह भी कि आखिर कितनी समस्याओं का सामना करें। और कई दफा समस्या का सामना करने के बाद भी समस्या जीत जाती है और जीवन छोटा हो जाता है।

ऐसी परिस्थिति में मनुष्य के अंतस में जीवन से नैराश्य की भावना भी पैदा होती है। तो इन समस्याओं के एक समग्र रूप में समाधान को जानने के लिए विवेक को थोड़ा समस्याओं के प्रति डर से दूर रखना चाहिए। समस्याओं को जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा मानकर, उनके साथ साथ चलना ही सही अर्थ में जीवन है।

अगर सब कुछ सहज रूप में मिल जाए, तो फिर मनुष्य को जीवन में कुछ करना ही ना पड़े और जब कुछ करना ही नहीं पड़े, तो फिर जीवन का कोई उद्देश्य नहीं रह जाता। दरअसल समस्याएं ही जीवन की दशा और दिशा तय करती हैं। बहरहाल, समस्याओं के रूप को एक छोटी सी कहानी से समझ सकते हैं। कहानी इस प्रकार है-एक व्यक्ति था, जो अपना निजी व्यवसाय करता था।

वो अपनी जिन्दगी से खुश नहीं था, हर समय वह किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका। शहर में चारों और उनकी काफी चर्चा थी। बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचने लगे, उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने का निश्चय किया। छुट्टी के दिन समय निकालकर उनके काफिले तक पहुंचा।

चूंकि वहां पहले से ही बहुत से लोगों की भीड़ थी, तो बहुत लंबा इंतजार करने के बाद उसका नंबर आया। वह महात्मा से बोला-‘मैं अपने जीवन में बहुत सी समस्याओं से जूझ रहा हूं, हर समय समस्या मुझे घेरे रहती है, कभी कभी कार्यालय का तनाव रहता है, तो कभी घर पर कोई अनहोनी हो जाती है, और कभी अपनी सेहत को लेकर परेशान रहता हूं। कोई ऐसा उपाय बताइए कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं खत्म हो जाएं और मैं चैन से जी सकूं।

महात्मा मुस्कुराए और बोले- वत्स, आज अब रात हो गई है, अब समय नहीं है।म् ौं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा, लेकिन क्या तब तक तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे? उसने कहा – जरूर महात्मा। महात्मा बोले, वत्स, हमारे काफिले में सौ ऊंट हैं, मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल रखो। जब सौ के सौ ऊंट बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना।

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पूछा – कहो वत्स, नींद तो अच्छी आई ना। वे परेशान सी मुद्रा बनाते हुए हुए बोला – कहां महात्मा जी, मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया। मैंने बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों को नहीं बैठा पाया, कोई न कोई ऊंट खड़ा हो ही जाता। सुबह तक सो नहीं पाया। महात्मा बोले – वत्स, बिल्कुल ठीक कह रहे हो।

कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लो सारे ऊंट एक साथ नहीं बैठ सकते, तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो जाएगा। जीवन में समस्याएं भी ठीक इसी तरह रहती है। वत्स, जब तक जीवन है, ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं कभी कम तो कभी ज्यादा। तो हमें क्या करना चाहिए? उस आदमी ने पूछा। महात्मा ने इत्मीनान से प्रत्युत्तर दिया-इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीख, जैसे कल रात क्या हुआ?

1) कई ऊंट रात होते-होते खुद ही बैठ गए
2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए,
3) बहुत से ऊंट तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे और बाद में तुमने पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए।
….अब आप इनसे कुछ समझे? समस्याएं भी ठीक ऐसी ही होती हैं।।
1) कुछ तो अपने आप ही खत्म हो जाती हैं ,
2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो
3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

….ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो, उचित समय पर वे खुद ही खत्म हो जाती हैं। जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी, पर इसका ये मतलब नहीं की तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो।
समस्याओं को एक तरफ रखो और जीवन का आनंद लो, चैन की नींद सो, जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएंगी। इस कहानी के सार को जीवन में उतार कर हम समस्याओं से मन मस्तिष्क को मुक्त रखकर आनंद में जीवन जी सकते हैं।

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