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आज है जन्माष्टमी व्रत तो जानें कैसे करें विस्तार से भगवान कृष्ण की पूजा

भगवान कृष्ण का जन्म भादो मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था। जिस कारण जन्माष्टमी की पूजा भी आधी रात यानी 12 बजे के करीब की जाती है। इन 16 चरणों में जानें जन्माष्टमी की पूजा विधि...

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24 अगस्त यानी कि आज पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व धूम धाम से मनाया जा रहा है। आपको बता दें कि कल 23 अगस्त को भी कई जगह कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। भगवान कृष्ण का जन्म भादो मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। और उनके जन्म के दिन को आज भी काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगावन कृष्ण की आधी रात यानी 12 बजे पूजा की जाती है। इनकी पूजा में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। यहां जानिए कृष्ण पूजा से संबंधित पूरी जानकारी…

पूजा की सामग्री – चौकी, लाल वस्‍त्र, भगवान कृष्ण के बाल रूप की मूर्ति, गंगाजल, मिट्टी का दीपक, घी, बत्ती, धूप, चंदन, रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, तुलसी ,पंचामृत, मक्खन, मिश्री, मिष्ठान, फल, बाल गोपाल के लिए वस्‍त्र, श्रृंगार की सामग्री, इत्र, फूलमाला, फूल और पालना।

जन्‍माष्‍टमी की पूजा विधि (Janmashtami Puja Vidhi): 

भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा नीशीथ काल यानी कि आधी रात को करने की परंपरा रही है। जन्‍माष्‍टमी की पूजा शुरू करने से पहले आप स्नान कर लें। उसके बाद ऊपर बताई गई सभी सामग्री साथ रखें और पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठ जाएं। फिर भगवान कृष्ण के पालने को सजाएं, चौकी पर लाल कपड़ा बिछा कर लड्डू गोपाल की मूर्ति स्‍थापित करें। पूजा में सबसे पहले गणेश जी की आरती करें। कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के दिन षोडशोपचार पूजा की जाती है, जिसके तहत 16 चरणों को शामिल किया जाता है:

1. सबसे पहले भगवान श्री कृष्‍ण का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
ॐ तमअद्भुतं बालकम् अम्‍बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदाद्युधायुदम्।
श्री वत्‍स लक्ष्‍मम् गल शोभि कौस्‍तुभं, पीताम्‍बरम् सान्‍द्र पयोद सौभंग।।
महार्ह वैढूर्य किरीटकुंडल त्विशा परिष्‍वक्‍त सहस्रकुंडलम्।
उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत।।
ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं,शंख चक्र गदाधरम्।
पीताम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। ध्‍यानात् ध्‍यानम् समर्पयामि।।

2. ध्यान करने के बाद हाथ जोड़कर इस मंत्र से श्रीकृष्‍ण का आवाह्न करें:
ॐ सहस्त्रशीर्षा पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्रपात्।
स-भूमिं विश्‍वतो वृत्‍वा अत्‍यतिष्ठद्यशाङ्गुलम्।।
आगच्छ श्री कृष्ण देवः स्थाने-चात्र सिथरो भव।।
ॐ श्री क्लीं कृष्णाय नम:। बंधु-बांधव सहित श्री बालकृष्ण आवाहयामि।।

3. इसके बाद श्रीकृष्‍ण को इस मंत्र का उच्चारण करते हुए आसन दें।
ॐ विचित्र रत्न-खचितं दिव्या-स्तरण-सन्युक्तम्।
स्वर्ण-सिन्हासन चारू गृहिश्व भगवन् कृष्ण पूजितः।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। आसनम् समर्पयामि।।

4. भगवान कृष्ण को आसन देने के बाद उनके पांव धोने के लिए पंचपात्र से जल समर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्र्च पुरुष:।
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि।।
अच्युतानन्द गोविंद प्रणतार्ति विनाशन।
पाहि मां पुण्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। पादोयो पाद्यम् समर्पयामि।।

5. अब श्रीकृष्‍ण को इस मंत्र के उच्‍चारण के साथ अर्घ्‍य दें:
ॐ पालनकर्ता नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरः।।
अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गन्धमाल्या-क्षतैयुतम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। अर्घ्यम् समर्पयामि।।

6. अब श्रीकृष्‍ण को आचमन के लिए जल देते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पुरुष:।
स जातो अत्यरिच्यत पश्र्चाद्भूमिनथो पुर:।।
नम: सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे।।
गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। आचमनीयं समर्पयामि।।

7. अब बारी है भगवान के स्नान करने की, भगवान श्रीकृष्‍ण की मूर्ति एक साफ पात्र में रखकर स्‍नान कराएं। सबसे पहले पानी से उसके बाद दूध, दही, मक्‍खन, घी और शहद से स्‍नान कराएं। अंत में पानी से एक बार और स्‍नान कराएं।
स्‍नान कराते वक्‍त आप इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
गंगा गोदावरी रेवा पयोष्णी यमुना तथा।
सरस्वत्यादि तिर्थानि स्नानार्थं प्रतिगृहृताम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। स्नानं समर्पयामि।।

8. स्नान कराने के बाद भगवान श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को किसी साफ और सूखे कपड़े से पोंछकर नए वस्‍त्र पहना लें और उन्‍हें पालने में रखते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
शति-वातोष्ण-सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहा-लंकारणं वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ में।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि।।

9. भगवान श्रीकृष्‍ण को यज्ञोपवीत समर्पित करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
नव-भिस्तन्तु-भिर्यक्तं त्रिगुणं देवता मयम्।
उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। यज्ञोपवीतम् समर्पयामि।।

10. अब श्रीकृष्‍ण को चंदन अर्पित करें और इस मंत्र को पढ़ें:
ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गंधाढ़्यं सुमनोहरम्।
विलेपन श्री कृष्ण चन्दनं प्रतिगृहयन्ताम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। चंदनम् समर्पयामि।।

11. इस मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्‍ण को धूप-अगरबत्ती दिखाएं:
वनस्पति रसोद भूतो गन्धाढ़्यो गन्ध उत्तमः।
आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोढ़्यं प्रतिगृहयन्ताम्।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। गंधम् समर्पयामि।।

12. अब श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को घी का दीपक दिखाएं और इस मंत्र का जाप करें:
साज्यं त्रिवर्ति सम्युकतं वह्निना योजितुम् मया।
गृहाण मंगल दीपं,त्रैलोक्य तिमिरापहम्।।
भक्तया दीपं प्रयश्र्चामि देवाय परमात्मने।
त्राहि मां नरकात् घोरात् दीपं ज्योतिर्नमोस्तुते।।
ब्राह्मणोस्य मुखमासीत् बाहू राजन्य: कृत:।
उरू तदस्य यद्वैश्य: पद्भ्यां शूद्रो अजायत।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। दीपं समर्पयामि॥

13. अब श्रीकृष्‍ण को भोग लगाएं और इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च
आहारो भक्ष्य- भोज्यं च नैवैद्यं प्रति- गृहृताम।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। नैवद्यं समर्पयामि।।

14. अब एक पान का पत्ता लें और उसे पलट कर उस पर लौंग-इलायची, सुपारी और कुछ मीठा रखकर ताम्बूल बनाएं और श्रीकृष्‍ण को समर्पित करें। साथ ही इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
ॐ पूंगीफ़लं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युतम्।
एला-चूर्णादि संयुक्तं ताम्बुलं प्रतिगृहृताम।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। ताम्बुलं समर्पयामि।।

15. अब सामर्थ्‍य के अनुसार श्रीकृष्‍ण को भेंट दें और इस मंत्र का उच्‍चारण करें:
हिरण्य गर्भ गर्भस्थ हेमबीज विभावसो:।
अनन्त पुण्य फलदा अथ: शान्तिं प्रयच्छ मे।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। दक्षिणां समर्पयामि।।

16. आखिरी में घी के दीपक से भगवान श्रीकृष्‍ण की आरती करें:
आरती युगलकिशोर की कीजै, राधे धन न्यौछावर कीजै।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरिख मेरो मन लोभा।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
गौरश्याम मुख निरखत रीझै, प्रभु को रुप नयन भर पीजै।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
कंचन थार कपूर की बाती . हरी आए निर्मल भई छाती।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
फूलन की सेज फूलन की माला . रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
मोर मुकुट कर मुरली सोहै,नटवर वेष देख मन मोहै।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
ओढे नील पीट पट सारी . कुंजबिहारी गिरिवर धारी।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
श्री पुरषोत्तम गिरिवरधारी. आरती करत सकल ब्रजनारी।।
।।आरती युगलकिशोर…।।
नन्द -नंदन ब्रजभान किशोरी . परमानन्द स्वामी अविचल जोरी।।
।।आरती युगलकिशोर…।।

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