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बृहस्पतिवार के दिन इस विधि से करें नारायण स्तोत्र का पाठ, बन सकते हैं जल्द विवाह के योग

Shighra Vivah Ke Upay : श्री नारायण स्तोत्र के पाठ को जल्दी शादी करवाने के उपायों (Jaldi Shadi Ke Upay) में खास माना जाता है।

shadi ke yog, vivah ke yog, shadi ke liye upayशीघ्र विवाह करने के लिए ज्योतिष शास्त्र के उपाय करने चाहिए।

Jyotish Remedies for Vivah Yog : बृहस्पतिवार को भगवान बृहस्पति का दिन माना जाता है। बृहस्पति ग्रह के स्वामी देवता भगवान विष्णु हैं। ज्योतिष शास्त्र यह मानता है कि बृहस्पति ग्रह शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विवाह को प्रभावित करने वाला ग्रह है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति ग्रह निचली स्थिति में होता है उसकी शादी में अड़चनें पैदा होती है।

ऐसे व्यक्ति का विवाह देरी से होता है। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि अगर बृहस्पतिवार के दिन के उपाय किए जाएं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं तो जल्द शादी के योग बन सकते हैं। श्री नारायण स्तोत्र के पाठ को जल्दी शादी करवाने के उपायों (Jaldi Shadi Ke Upay) में खास माना जाता है।

श्री नारायण स्तोत्र पाठ विधि (Shri Narayan Stotra Paath Vidhi)
बृहस्पतिवार के दिन स्नानादि कर पवित्र हो जाएं। साथ ही पीले रंग के वस्त्र पहनें।
पीले रंग के आसन पर बैठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
फिर अपने सामने एक चौकी रखें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा लगाएं।
भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित कर यह प्रार्थना करें कि वह आपकी शादी के योग जल्दी बनवाएं।
भगवान विष्णु को पीले फूलों की माला चढ़ाकर दीपक जलाएं।
इसके बाद श्री नारायण स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ पूरा होने के बाद भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाएं।
साथ ही गाय के लिए पीला भोजन दान करें। आप चाहें तो केले खिला सकते हैं। लेकिन स्वयं बृहस्पतिवार के दिन केले न खाएं।

श्री नारायण स्तोत्र (Shri Narayan Stotra)
नारायण नारायण जय गोविंद हरे ॥
नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥
करुणापारावारा वरुणालयगम्भीरा ॥
घननीरदसंकाशा कृतकलिकल्मषनाशा ॥

यमुनातीरविहारा धृतकौस्तुभमणिहारा ॥
पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना ॥
मंजुलगुंजाभूषा मायामानुषवेषा ॥
राधाऽधरमधुरसिका रजनीकरकुलतिलका ॥

मुरलीगानविनोदा वेदस्तुतभूपादा ॥
बर्हिनिवर्हापीडा नटनाटकफणिक्रीडा ॥
वारिजभूषाभरणा राजिवरुक्मिणिरमणा ॥
जलरुहदलनिभनेत्रा जगदारम्भकसूत्रा ॥

पातकरजनीसंहर करुणालय मामुद्धर ॥
अधबकक्षयकंसारे केशव कृष्ण मुरारे ॥
हाटकनिभपीताम्बर अभयं कुरु मे मावर ॥
दशरथराजकुमारा दानवमदस्रंहारा ॥

गोवर्धनगिरिरमणा गोपीमानसहरणा ॥
शरयूतीरविहारासज्जनऋषिमन्दारा ॥
विश्वामित्रमखत्रा विविधपरासुचरित्रा ॥
ध्वजवज्रांकुशपादा धरणीसुतस्रहमोदा ॥

जनकसुताप्रतिपाला जय जय संसृतिलीला ॥
दशरथवाग्घृतिभारा दण्डकवनसंचारा ॥
मुष्टिकचाणूरसंहारा मुनिमानसविहारा ॥
वालिविनिग्रहशौर्या वरसुग्रीवहितार्या ॥

मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर ॥
जलनिधिबन्धनधीरा रावणकण्ठविदारा ॥
ताटीमददलनाढ्या नटगुणविविधधनाढ्या ॥
गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन ॥

स्रम्भ्रमसीताहारा साकेतपुरविहारा ॥
अचलोद्घृतिञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर ॥
नैगमगानविनोदा रक्षःसुतप्रह्लादा ॥
भारतियतिवरशंकर नामामृतमखिलान्तर ॥

। इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं नारायणस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ।

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