ageshwar Temple Uttarakhand: आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम के बारे में, यह मंदिर घने देवदार के जंगलों और जटा गंगा नदी के तट पर स्थित है। जागेश्वर धाम भगवान शिव के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी तीर्थों में गिना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। माना जाता है कि यहां शिवलिंग पूजा की परंपरा का आरंभ हुई थी, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

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जागेश्वर मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार जागेश्वर धाम मंदिर समूह का निर्माण मुख्य रूप से 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी और चंद शासकों के संरक्षण में हुआ। यहां 100 से अधिक प्राचीन पत्थर के मंदिर मौजूद हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में मौजूद यह मंदिर समूह उत्तराखंड की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है।

मंदिर परिसर में क्या है खास?

जागेश्वर धाम में 124 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इनमें जागेश्वर महादेव, महामृत्युंजय मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, कालिका मंदिर, सूर्य मंदिर और नीलकंठेश्वर मंदिर प्रमुख हैं। मंदिरों पर बनी नक्काशी, शिलालेख और प्राचीन मूर्तियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इतिहास और आध्यात्मिकता का अनुभव कराती हैं।

जागेश्वर धाम का महत्व

जागेश्वर धाम को भगवान शिव की तपोस्थली माना जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान द्वादश ज्योतिर्लिंगों से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण में भी इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। यहां स्थित महामृत्युंजय मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां श्रद्धालु दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना से पूजा-अर्चना करते हैं।

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जागेश्वर धाम कैसे पहुंचे?

जागेश्वर धाम अल्मोड़ा से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। अल्मोड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल और काठगोदाम से यहां के लिए नियमित टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं सबसे पास रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो जागेश्वर से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं सबसे पास हवाई अड्डा पंतनगर एयरपोर्ट है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा अल्मोड़ा होते हुए जागेश्वर धाम पहुंचा जा सकता है।

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डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।