विश्व योग दिवस 2026 विशेष: योग केवल कोई शारीरिक व्यायाम या आसन नहीं है। योग एक पूर्ण विज्ञान है। यह शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्मांड को एकाकार करता है। योग प्रत्येक व्यक्ति के भीतर शांति का संचार करता है। यह व्यक्ति के व्यवहार, विचार शैली और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाता है। योग लगभग अपरिहार्य है। यदि आप मानसिक रूप से स्वस्थ, संवेदनशील, समझदार, सशक्त और अंतर्ज्ञानी बनना चाहते हैं, तो आपको योग अपनाना चाहिए। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से जानिए कैसे केवल आसन नहीं, आत्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया है..
निस्संदेह, आसन योग का एक हिस्सा हैं लेकिन इसे केवल आसन तक सीमित नहीं रखना चाहिए या इसे मात्र कसरत समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। योग मानव जीवन के समग्र विकास और अभिव्यक्ति से संबंधित है।
हर बच्चे में छिपा होता है एक योगी का स्वभाव
प्रत्येक शिशु एक योगी है। एक शिशु, एक योगी के सभी गुणों को प्रदर्शित करता है – उसकी शारीरिक मुद्राएं, श्वास लेने की लय, बोध क्षमता, कुशाग्रता और वर्तमान क्षण में रहने की क्षमता। योग के माध्यम से, हम अपने मूल स्वभाव की ओर लौटते हैं जो पूर्णतः आनंद, परमानंद और प्रेममय है। जब हर तरफ निराशा दिखाई देती है, तो वह योग ही है जो जीवन में उत्साह, ऊर्जा और अंतर्ज्ञान क्षमता लेकर आता है।
श्री श्री रवि शंकर बताते हैं योग का वास्तविक अर्थ
प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर बताते हैं कि कैसे योग कर्मों में कुशलता लाने का नाम है। योग और कौशल समानार्थी हैं; यदि आप कुशल हैं, तो इसका अर्थ है कि आपने कहीं न कहीं योग के सिद्धांतों का पालन किया है। वे कहते हैं, “कौशल यह देखने में है कि आप अपनी चेतना को कैसे उन्नत रखते हैं, अपनी ऊर्जा को क्षीण होने से कैसे बचाते हैं और फिर भी अपना काम पूरा कर लेते हैं।” योग वह कौशल है जो आपकी ऊर्जा के स्तर व जीवतंता को उच्च बनाए रखता है।
योग: तनाव, क्रोध और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति का मार्ग
योग एक विद्या है, एक ऐसी तकनीक जो आपको अधिक ऊर्जावान, अधिक प्रसन्न और अधिक करुणामय बनाने में सक्षम करेगी। यह एक ऐसी तकनीक है जो तनाव, क्रोध, लालच और सभी नकारात्मक भावनाओं को दूर करती है।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के योग पर विचार
“लहर का अपनी गहराई के साथ एकाकार हो जाना ही योग है।”
“अपनी इंद्रियों को विषय-वस्तुओं से हटाकर उनके उद्गम की ओर मोड़ें, तब मिलन होता है, योग घटित होता है।”
“प्रसन्न रहने का अभ्यास विकसित करना योग के नियमों में से एक है।”
“योग वह कुंजी है जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सुख और आनंद के द्वार खोल देती है।”
“योग का उद्देश्य आपके दैनिक जीवन के सभी तनावों, चिंताओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आपके चेहरे पर मुस्कान लाना है।”
“योग हमें तनावमुक्त जीवन जीने के लिए आवश्यक साधन और तकनीकें प्रदान करता है।”
“योग का ज्ञान व्यक्ति को स्वतंत्रता की लालसा से निकालकर असीमता की अनुभूति की ओर, और सीमित स्वामित्व से निकालकर संपूर्ण ब्रह्मांड के साथ एकाकार होने की ओर रूपांतरित करता है।”
“योग आपको अपनी ही भावनाओं का शिकार होने के बजाय, किसी भी समय अपनी इच्छानुसार महसूस करने के लिए सशक्त बनाता है। यह आपको स्वतंत्र बनाता है।”
“योग का अर्थ है एकात्मता। योग हमारे हृदय, मन, शरीर और आत्मा को एक करता है। यह हमारे आस-पास के लोगों व वातावरण के साथ आत्मीयता की भावना उत्पन्न करता है।”
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में प्रस्तुत जानकारी योग, ध्यान और आध्यात्मिक गुरु के विचारों पर आधारित सामान्य जानकारी और प्रेरणात्मक उद्देश्य के लिए दी गई है। यह लेख किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया योग्य चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। योग और ध्यान से संबंधित अभ्यास व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर कर सकते हैं। किसी भी नई स्वास्थ्य या योग दिनचर्या को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा। इस सामग्री का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और सकारात्मक जीवनशैली के लिए प्रेरित करना है
