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Astrology: धन, ऐश्वर्य और मान-सम्मान दिलाता है इंद्र योग, देखें- कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं बन रहा यह संयोग

इंद्र योग: जिस व्यक्ति की कुंडली में शुभ योग होते हैं। उसका जीवन शानदार रहेगा। जिस व्यक्ति की कुण्डली अशुभ योग हैं उसका जीवन कष्टमय रहेगा। आज हम बात करेंगे शुभ इंद्रयोग के बारे में-

Astrology: धन, ऐश्वर्य और मान-सम्मान दिलाता है इंद्र योग, देखें- कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं बन रहा यह संयोग
इंद्रयोग कैसे बनता है?

Indra Yog Benefits: ज्योतिष में योगों का बहुत महत्व है। वे ग्रहों के विभिन्न प्रभावों के कारण बनते हैं। इन योगों में जन्म लेने वाले व्यक्ति के जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन होते हैं। ज्योतिष में 27 प्रकार के योगों का उल्लेख है। इनमें गजकेसरी योग, रुचिक योग, भाद्र योग और हंस योग शामिल हैं। आज हम बात करेंगे बहुत ही महत्वपूर्ण इंद्र योग के बारे में। कुंडली में कैसे बनता है यह योग? इसके क्या फायदे हैं? आइए जानते हैं-

इंद्र योग दुर्लभ नहीं है बल्कि कुंडली में एक शुभ योग है जो व्यक्ति को कई लाभ प्रदान करता है। यह तब बनता है जब पंचम और एकादश भावों के स्वामी आपस में अदला-बदली करते हैं और चंद्रमा भी पंचम भाव में होना चाहिए । जिन लोगों की कुंडली में यह योग होता है वे बहुत साहसी होते हैं और किसी भी संगठन या समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हैं। ये लोग अपने मुखर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं और सार्वजनिक जीवन में बड़ी प्रसिद्धि और सफलता प्राप्त करते हैं।

इंद्र योग के ऐसे कई उदाहरण हैं जहां एक व्यक्ति ने लंबे जीवन का आनंद नहीं लिया लेकिन उसकी प्रसिद्धि लंबे समय तक बनी रही। सिकंदर महान और ईसा मसीह दोनों ने एक छोटा जीवन जिया लेकिन उनकी प्रसिद्धि आज भी कायम है। इन दोनों महापुरुषों की कुंडली में यह योग था। हालांकि, यदि अष्टम भाव यानी दीर्घायु का घर मजबूत है, तो आपकी कुंडली में इंद्र योग होने की स्थिति में चिंता करने का कोई कारण नहीं है।

इंद्र योग क्या है?

ज्योतिष में वर्णित 27 योगों में से इंद्र योग एक शुभ योग है। जातक की कुंडली में इस योग का बनना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे सभी रुके हुए कार्य पूरे होंगे। साथ ही उस व्यक्ति के करियर में भी तरक्की होगी।

इंद्रयोग कैसे बनता है?

इंद्र योग तब होता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल चंद्रमा से तीसरे स्थान पर हो और शनि सातवें स्थान पर हो। वहीं दूसरी ओर शनि से सप्तम भाव में शुक्र और शुक्र से सप्तम भाव में गुरु होना चाहिए।

समाज में बढ़त है मान- सम्मान

इंद्र योग तुला राशि के व्यक्ति को कई लाभ देता है। इस शख्स की होगी अष्टा ऐश्वर्या। साथ ही समाज में मान सम्मान बढ़ता है। वह सदा धर्म के मार्ग पर चलता है। आर्थिक लाभ होगा। कुंडली में इस योग वाला व्यक्ति बहुत बुद्धिमान होता है।

जातक बहुत बुद्धिमान और राजनेता होता है

जिसकी कुण्डली में इंद्र योग होता है। वह जातक बहुत बुद्धिमान होता है। राजनेता बनने की संभावना है। उसके पास कभी पैसों की कमी नहीं होती। उन्हें अपार धन की प्राप्ति होती है। इस योग वाले व्यक्ति को समाज में मान सम्मान और प्रसिद्धि प्राप्त होती है।

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First published on: 06-10-2022 at 04:01:59 pm