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सावन में भगवान शिव के इन तीनों रूपों की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की है मान्यता

ऐसा कहा जाता है कि शिव जी के नटराज स्वरूप की पूजा करने से जीवन की समस्त परेशानियों का हल निकल जाता है। कहते हैं कि नटराज स्वरूप को ज्ञान, विद्या, संगीत और कला का वरदान देता है।

Author नई दिल्ली | August 22, 2018 5:32 PM
भगवान शंकर।

सावन का पवित्र महीना चल रहा है। सावन को भगवान शिव का भी पसंदीदा महीना बताया गया है। कहते हैं कि सावन में शिव जी की पूजा-अर्चना करने पर बड़ी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। शिवभक्त सावन माह में भोले बाबा की भक्ति में डूबे हुए नजर आते हैं। इस बीच हम आपको भगवान शिव के तीन ऐसे रूपों के बारे में बता रहे हैं जिनकी सावन में पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। शिव जी के ये तीन रूप हैं- नीलकंठ, मृत्युंजय और नटराज। शिव जी के इन रूपों को परम कल्याणी बताया गया है। कहते हैं कि इन तीन रूपों की पूजा करने से जीवन की अलग-अलग समस्याओं का समाधान निकलता है।

भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप के बारे में कहा जाता है कि ये ग्रहों को नियंत्रित करता है। बताते हैं कि शिव जी ने मानवता की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकले विष का पान कर लिया था। इससे उनका कंठ नीला हो गया और तभी से उनका नाम नीलकंठ पड़ गया। मान्यता है कि शिव के नीलकंठ स्वरूप की उपासना करने से शत्रु बाधा, षड़यंत्र और तंत्र-मंत्र का असर नहीं होता। और व्यक्ति एक सुखमय जीवन जीता है। मालूम हो कि नीलकंठ स्वरूप पर गन्ने के रस का जलाभिषेक करना भी काफी शुभ माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि शिव जी के नटराज स्वरूप की पूजा करने से जीवन की समस्त परेशानियों का हल निकल जाता है। कहते हैं कि नटराज स्वरूप को ज्ञान, विद्या, संगीत और कला का वरदान देता है। माना जाता है कि शिव जी ने ही नृत्य, संगीत और कला का आविष्कार किया था। इसके अलावा शिव के महामृत्युंजय स्वरूप की सावन में उपासना करना भी बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि महामृत्युंजय स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

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