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इस्लाम धर्म में दिन में पांच बार क्यों पढ़ा जाता है नमाज, जानिए

नमाज के बारे में पवित्र कुरान में एक आयात का जिक्र मिलता है। जिसके माध्यम से कहा गया है कि "ऐ ईमान वालों सब्र और नमाजों से काम लो"।

Author नई दिल्ली | June 28, 2019 2:49 PM
इस्लाम धर्म में दिन में पांच बार क्यों पढ़ा जाता है नमाज, जानिए।

नमाज के फारसी शब्द है। कुरान शरीफ में नमाज शब्द बार-बार आया है। इस्लाम धर्म में हर मुसलमान स्त्री और पुरुष के लिए दिन में पांच बार नमाज पढ़ने का विधान है। पवित्र कुरान में कहा गया है कि जितनी बार नमाज अदा की जाती है उतनी ही बार अजान भी दी जाती है। अजान देने वाले सख्स को मुअज्जिन कहा जाता है। यह बात आज भी बहुत कम लोग जानते हैं कि दिन में पांच बार नमाज क्यों पढ़ी जाती है। क्या आप जानते हैं कि यह ऐसा क्यों है? यदि नहीं तो आगे हम इसे कुरान के अनुसार जानते हैं। कुरान के मुताबिक इस्लाम के आरंभ काल से ही नमाज की प्रथा और उसे पढ़ने का आदेश है। यह मुसलमानों का बहुत बड़ा कर्तव्य है। साथ ही इसे नियम पूर्वक पढ़ना पुण्य और त्याग देना पाप है।

  • पहली नमाज (नमाज-ए-फ़जर)- यह उषा काल की नमाज है जो सुबह सूर्य के उगने से पहले पढ़ी जाती है।
  • दूसरी नमाज (नमाज-ए जुह्र)- यह अवनति काल की नमाज है। जिसे सूर्य के ढलना शुरू होने के बाद पढ़ी जाती है।
  • तीसरी नमाज (नमाज -ए-अस्र) यह सूर्यास्त के समय की नमाज है। जिसे सूरज के डूबने (अस्त) से कुछ वक्त पहले अदा की जाती है।
  • चौथी नमाज (नमाज-ए-मग़रिब) यह संध्या काल की नमाज है। जिसे सूरज अस्त (डूबने) के तुरंत बाद अदा की जाती है।
  • पंचवीं नमाज (नमाज-ए-इषा) यह रात की नमाज है। जिसे सूरज डूबने के डेढ़ घंटे बाद अदा की जाती है।

नमाज के बारे में पवित्र कुरान में एक आयात का जिक्र मिलता है। जिसके माध्यम से कहा गया है कि “ऐ ईमान वालों सब्र और नमाजों से काम लो”। नमाज खालिस बंदे की आसानी के लिए अल्लाह की नेमत है। दिन में पांच बार नमाज की मिसाल इंसान के दरवाजे पर स्थित पांच पवित्र नहरों की तरह है। कुरान कहता है कि जिस प्रकार इन पांच नहरों में नहाकर पवित्र हो सकता है। ठीक उसी प्रकार दिन में पांच बार नमाज अदा कर इंसान दुनिया द्वारा दी गई कलिख और मैल को धो डालते हैं। साथ ही दिन में पांच बार पढ़े जाने वाले नमाज से अल्लाह का डर और उसकी मदद से इंसान को कामयाब बनाने में मदद करते हैं।

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