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शक्तिपीठों में कामाख्या माता मंदिर का महत्व है खास, जानिए नवरात्रि से क्या है कनेक्शन

पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार यह वही जगह है जहां माता सती और भगवान शिव ने साथ में कुछ पल बिताए थे। कहते हैं कि इस स्थान पर ही माता सती की योनि गिरि थी।

Author नई दिल्ली | April 5, 2019 3:32 PM
कामाख्या मंदिर।

शक्तिपीठों में कामाख्या माता मंदिर का खास महत्व है। चैत्र नवरात्रि शक्ति यानि देवी दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ मां दुर्गा की उपासना करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त देवी दुर्गा की उपासना और दर्शन के लिए शक्तिपीठ जाते हैं। कामाख्या का शक्तिपीठ भी इन्हीं में से एक है। शास्त्रों में इस स्थान की अत्यधिक महिमा बताई गई है। नवरात्रि में इस स्थान का दर्शन करना हर मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ है। आगे हम जानते हैं कि शक्तिपीठों में कामाख्या माता मंदिर का क्या खास महत्व है। साथ ही इसका नवरात्रि से क्या कनेक्शन है।

पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार यह वही जगह है जहां माता सती और भगवान शिव ने साथ में कुछ पल बिताए थे। कहते हैं कि इस स्थान पर ही माता सती की योनि गिरि थी। इस मंदिर का रहस्य ऐसा है कि यहां मंदिर के दीवारों से खून निकलता है। इस मंदिर के रहस्य और चमत्कार को समझने के लिए शिव-सती की ये कथा जानना आवश्यक है। जब प्रजापति दक्ष ने माता सती के सामने भगवान शिव का अपमान किया था। तब महादेव के अपमान का कारण स्वयं को मानकर माता सती ने अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए थे। अपनी पत्नी सती को मारा हुआ देख महादेव बहुत क्रोधित हुए। जिसके बाद उन्होंने अपने अवतार वीरभद्र को प्रजापति दक्ष का नाश करने के लिए भेजा था। और भगवान शिव सती के जलते हुए शरीर को अपने साथ लिए पूरे ब्रह्मांड में भटकने लगे।

सती के वियोग में महादेव बहुत दुखी हो चुके थे और माता सती के जले हुए शरीर को छोड़ नहीं रहे थे। ऐसे में महादेव के दुख और क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के जले हुए शरीर को 51 टुकड़ों में बांट दिया। ये सभी 51 शरीर के अंग धरती पर अलग-अलग जगह गिरे। इन्हें ही 51 शक्तिपीठ कझ जाता है। जिस स्थान पर माता सती की योनि गिरि थी वह जगह गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर नीलांचल या कामगिरी पर्वत पर है। यहीं पर है रहस्यमयी कामाख्या देवी मंदिर। बता दें कि इस मंदिर में कोई भी मूर्ति नहीं है।

मंदिर के अंदर एक गुफा है और उस गुफा में एक किनारे एक चट्टान के ऊपर योनि की आकृति उभरी हुई है। गुफा के अंदर प्राकृतिक झड़ने के कारण इसके भीतर हमेशा गीलापन रहता है। चट्टान के ऊपर उभरी हुई योनि की आकृति की पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस मंदिर में देश भर के तांत्रिक साधना और तपस्या करने के लिए आते हैं। कामाख्या माता को हर इच्छा पूरी करने वाली माना जाता है। यहां चैत्र नवरात्रि में भक्तों और तंत्रिकों की कतार लगी हुई रहती है। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में जो भी भक्त यहां कामाख्या माता के दर्शन के लिए आते हैं, उनकी हर मनोकामना जल्द ही पूरी होती है।

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