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माता वैष्णो की यात्रा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

कटरा से माता के दरबार तक की दूरी 13 किलोमीटर की है। आप चाहें तो पैदल यात्रा कर सकते हैं या फिर यात्रा करने के लिए घोड़ा, खच्चर, पिट्ठू या पालकी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सवारी आपको वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान कभी भी मिल सकती है।

माता वैष्णो का दरबार।

भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है माता वैष्णो देवी का दरबार। जहां साल के 12 महीने माता के दर्शन होते हैं। मां लक्ष्मी, सरस्वती और काली पिंडी रूप में यहां विराजमान है। जम्मू के कटरा शहर के त्रिकुट पर्वत पर मौजूद यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है। हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। लोगों का मानना है कि मां उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं। अत: माता के घर से कोई व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता है। मान्यता है कि माता वैष्णो का जब बुलावा आता है तो व्यक्ति किसी ना किसी तरह यहां पहुंच ही जाता है।

कैसे कर सकते हैं यात्रा

कटरा से माता के दरबार तक की दूरी 13 किलोमीटर की है। आप चाहें तो पैदल यात्रा कर सकते हैं या फिर यात्रा करने के लिए घोड़ा, खच्चर, पिट्ठू या पालकी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सवारी आपको वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान कभी भी मिल सकती है। इसके अलावा कटरा से सांझी छत के बीच नियमित रूप से हेलिकॉप्टर सर्विस भी मौजूद है। सांझी छत से माता के दरबार की दूरी सिर्फ 2.5 किलोमीट की रह जाती है। जिसके लिए आप चाहे तो पैदल या किसी भी सवारी का प्रयोग कर सकते हैं।

कब जाएं वैष्णो देवी?

वैसे तो वैष्णो माता का दरबार पूरे साल भक्तों के लिए खुला रहता है। लेकिन गर्मियों में मई से जून और नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती है। बारिश के दौरान यानी जुलाई से अगस्त के बीच में यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि यात्रा मार्ग पर फिसलन की वजह से चढ़ाई थोड़ी मुश्किल हो जाती है। इसके अलावा दिसंबर से जनवरी के बीच यहां जबरदस्त ठंड रहने के कारण लोगों की भीड़ थोड़ी कम हो जाती है।

यात्रा के दौरान इन चीजों को रखें साथ

बेस कैंप कटरा जहां समुद्र तल से 2 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर है तो वहीं वैष्णो देवी का मंदिर समुद्र तल से 5 हजार 200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जिस कारण इन दोनों जगहों के तापमान में काफी अंतर रहता है। अगर मॉनसून में यात्रा कर रहे हैं तो रेनकोट या छाता साथ जरूर रखें। ठंड के मौसम में ऊनी कपड़े साथ रखना न भूलें। चढ़ाई करते समय आरामदायक जूते पहनें। जिससे यात्रा करने में ज्यादा परेशानी ना हो। गर्माी के मौसम में भी कुछ गर्म कपड़े साथ रखे लें तो बेहतर होगा। क्योंकि यहां मौसम कभी भी परिवर्तित हो जाता है। हालांकि यात्रा के दौरान कंबल की सुविधा भी मिलती है।

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