मृत्यु के बाद कहां जाती है आत्मा और कैसे निकलते हैं प्राण, जानिए क्या कहता है गरुड़ पुराण

भगवान विष्णु ने जो प्रवचन अपने वाहन पक्षिराज गरुड़ को दिए हैं उसे ही गरुड़ पुराण के नाम से जाना जाता है। यहां आप जानेंगे गरुड़ पुराण में मरने के बाद की दुनिया कैसी बताई गई है।

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गरुड़ पुराण अनुसार जब मृत्यु का समय नजदीक आ जाता है तो यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने आते हैं।

Life After Death According Garud Puran: गरुड़ पुराण को मृत्यु के बाद मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। इसके प्रथम भाग में भगवान विष्णु की अराधना के तरीकों के बारे में बताया गया है तो दूसरे भाग में मृत्यु के बाद आत्मा की कैसी गति होगी इस बात का वर्णन मिलता है। भगवान विष्णु ने जो प्रवचन अपने वाहन पक्षिराज गरुड़ को दिए हैं उसे ही गरुड़ पुराण के नाम से जाना जाता है। यहां आप जानेंगे गरुड़ पुराण में मरने के बाद की दुनिया कैसी बताई गई है।

13 दिनों तक घर में रहती है आत्मा: गरुड़ पुराण अनुसार जब मृत्यु का समय नजदीक आ जाता है तो यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने आते हैं। यमदूतों के आते ही आत्मा शरीर से निकल जाती है। यमदूत आत्मा को यमलोक ले जाते हैं जहां उसे 24 घंटे तक रखा जाता है। इस पुराण के मुताबिक इन 24 घंटों में आत्मा को ये बताया जाता है कि उसने क्या-क्या अच्छे कर्म किये हैं और क्या-क्या बुरे। इसके बाद आत्मा को फिर से वहां छोड़ दिया जाता है जहां उसका पूरा जीवन बीता था। कहा जाता है कि 13 दिनों तक आत्मा अपने परिजनों के बीच रहती है।

मृत्यु के बाद यहां जाती है आत्मा: कहा जाता है जिन लोगों के कर्म अच्छे होते हैं उन्हें मृत्यु के समय उतना कष्ट नहीं होता लेकिन जिनके कर्म बुरे होते हैं उन्हें मृत्यु के समय काफी कष्ट और पीड़ा सहनी पड़ती है। गरुड़ पुराण के अनुसार 13 दिनों के बाद आत्मा फिर से यमलोक जाती है। यमलोक के रास्ते में उसे चार मार्ग मिलते हैं। जिसमें ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक और नर्कलोक होते हैं। व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ये निर्धारित किया जाता है कि उसे कौन सा लोक मिलेगा। (यह भी पढ़ें- पैसों के मामले में लकी माने जाते हैं इस मूलांक के लोग, शान-ओ-शौकत के साथ जीना करते हैं पसंद)

कौन सा लोक मिलता है? गरुड़ पुराण अनुसार ब्रह्मलोक उसे ही मिलता है जिसने कठोर योग और तप के बल पर मोक्ष प्राप्त किया हो। देवलोक उन्हें मिलता है जिन लोगों के कर्म अच्छे रहे हों। यहाँ आने वाली आत्मा कुछ समय यहाँ रहने के बाद फिर से मनुष्य योनि में जन्म ले लेती है। पितृलोक में पुण्य आत्माओं को स्थान मिलता है। कहते हैं मृत आत्माएं यहाँ अपने पितरों से मिलती हैं और उनके साथ समय बिताने के बाद फिर से मनुष्य योनि में जन्म ले लेती हैं। नर्कलोक में वो आत्माएं आती हैं जो अपने जीवन काल में पापकर्मों में लिप्त रही हों। इन आत्माओं को कुछ समय यहां गुजारने के बाद उनके कर्मों के अनुसार अन्य योनि में जन्म मिलता है। (यह भी पढ़ें- शनि साढ़े साती या शनि ढैय्या से हैं परेशान, तो शनि त्रयोदशी पर करें ये ज्योतिषीय उपचार)

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