हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। होलिका दहन का महत्व भक्त प्रह्लाद की कथा पर आधारित है जो यह संदेश देता है कि कितना भी बड़ा अन्याय हो अंत में सत्य की ही जीत होती है। साथ ही यह रंगों का त्यौहार आपसी मनमुटाव भुलाकर भाईचारे समानता और एकता को बढ़ावा देता है, जहां पुराने गिले-शिकवे भूलकर लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि दो दिन लग रही है।

वहीं 2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि लग रही है जो अगले दिन 3 मार्च की शाम तक रहेगी।  लेकिन प्रदोष कल लगने से पूर्व ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। होलिका दहन को लेकर एक तो तिथियों की ऐसी उलझन है दूसरी ओर भद्रा का साया भी पूर्णिमा तिथि के साथ बना रहने वाला है। साथ ही 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है। ऐसे में होलिका दहन का शुभ समय 2 मार्च को प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 22 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट के बीच किया जाना उत्तम होगा। साथ कुछ जगह पर 3 मार्च को ग्रहण समाप्त होने के बाद होलिका दहन होगा। साथ ही 4 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी। वहीं इस साल होली पर 500 साल बाद शुक्र ग्रह मालव्य महापुरुष राजयोग बन रहा है। वहीं सूर्य और बुध के संयोग से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। साथ ही सूर्य, बुध, मंगल और राहु का योग बन रहा है। जिससे होली पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में जानते हैं कब होगा होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, तिथि और सबकुछ…


Live Updates
19:39 (IST) 3 Mar 2026

राधा-कृष्ण और रंगों की होली

एक कथा के अनुसार, होली खेलने का संबंध श्री कृष्ण और ब्रज की राधा से है। एक गाना आपने भी सुना होगा, यशोमती मैया से बोले नंद लाला, राधा क्यों गोरी…’ इससे ही कहानी जुड़ी हुई है। दरअसल, कृष्ण ने अपनी माता यशोदा से पूछा कि राधा इतनी गोरी क्यों हैं? यशोदा जी ने मजाक में कहा कि तुम राधा को अपने जैसा रंग लगा दो। तब कृष्ण ने अपने सखाओं के साथ मिलकर रंग तैयार किए और ब्रज में राधा रानी को रंग लगाने पहुंच गए, जिससे रंग वाली होली की परंपरा शुरू हुई। आज भी बरसाना की लठमार होली इस परंपरा की याद दिलाती है।

19:17 (IST) 3 Mar 2026

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा

होली से जुड़ी यह कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। दरअसल, हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा राक्षसों का एक राजा था। वह भगवान विष्णु को अपना दुश्मन मानता था। राक्षस राजा अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद विष्णु भक्त था। उसने अपने बेटे को कई यातनाएं दीं। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को पहाड़ से नीचे गिराया, हाथी के पैरों से कुचलवाया, लेकिन वह बचता रहा और भगवान विष्णु की भक्ति करता रहा। अंत में, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे आग में न जलने का वरदान था, वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। लेकिन होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।

17:50 (IST) 3 Mar 2026

आरती कुंजबिहारी की (Aarti Kunj Bihari ki)

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।(टेक)

गले में बैजंतीमाला,

बजावै मुरलि मधुर बाला।

श्रवन में कुण्डल झलकाला,

नंद के आनंद नंदलाला।

श्री गिरिधर कृष्न मुरारी की।।

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली;

भ्रमर सी अलक, कस्तूरी-

तिलक, चंद्र-सी झलक,

ललित छबि स्यामा प्यारी की,

श्री गिरिधर कृष्न मुरारी की।।

कनकमय मोर-मुकुट बिलसै,

देवता दरसनकों तरसै,

गगन सों सुमन रासि बरसै,

बजे मुरचंग, मधुर-

मिरदंग, ग्वालिनी संग,

अतुल रति गोपकुमारीकी।

श्री गिरिधर कृष्न मुरारी की।।

जहां ते प्रकट भई गंगा,

सकल-मल-हारिणि श्रीगंगा।

स्मरन ते होत मोह-भंगा,

बसी सिव सीस, जटाके बीच,

हरै अघ कीच,

चरन छबि श्रीबनवारी की।

श्री गिरिधर कृष्न मुरारी की।।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,

बज रही बृन्दावन बेनू।

चहूं दिसि गोपि ग्वाल धेनू,

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,

कटत भव-फंद,

टेर सुनु दीन दुखारी की।

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

17:23 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन का महत्व (Holika Dahan Importance)

हिंदू धर्म में होलिका दहन का विशेष महत्व है। वहीं आपको बता दें कि होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। होलिका दहन के दौरान घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मान्यता है कि होलिका दहन से घर से निगेटिविटी दूर होती है।

15:58 (IST) 3 Mar 2026

चंद्र ग्रहण के कितने समय बाद खेली जाएगी रंगों वाली होली?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद यानी आज शाम करीब 7:15 बजे के बाद रंगों वाली होली खेली जा सकती है। इस समय के बाद सोसाइटी, कॉलोनियों और पार्कों में लोग निश्चिंत होकर होली का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा, अगले दिन सुबह और दिन में भी परंपरागत रूप से होली खेली जाएगी, जिससे लोग दोनों समय उत्सव का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।

15:04 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन की पूजा के समय बोले ये मंत्र (Holika Dahan 2026 Mantra)

अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:

अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।

14:32 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन 2026 शहर और समय

दिल्ली: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

नोएडा: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

मथुरा: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

भोपाल: शाम 6:24 से रात 8:50 तक

लखनऊ: शाम 6:09 से रात 8:37 तक

पटना: शाम 6:00 से रात 8:15 तक

मुंबई: शाम 6:45 से रात 9:10 तक

चंडीगढ़: शाम 6:25 से रात 8:55 तक

शिमला: शाम 6:25 से रात 8:55 तक

जयपुर: शाम 6:30 से रात 8:59 तक

वाराणसी: शाम 6:02 से रात 8:58 तक

रायपुर: शाम 6:11 से रात 8:38 तक

बेंगलुरु: शाम 6:30 से रात 8:55 तक

चेन्नई: शाम 6:22 से रात 8:47 तक

हैदराबाद: शाम 6:50 से रात 8:32 तक

13:41 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन के लिए संपूर्ण पूजन सामग्री (Holika Pujan Samagri)

कच्चा सूती धागा

नारियल

गुलाल

रोली

अक्षत

धूप

फूल

बताशे

नया अनाज

मूंग की साबुत दाल

हल्दी का टुकड़ा

एक कटोरी पानी

हवन सामग्री

गुड़

चावल

मिठाई

फल

गेहूं का आटा

पुष्प माला

गाय का घी

सरसों का तेल

मिट्टी का दीपक

गाय के गोबर के उपले

गंगाजल

कपूर

अगरबत्ती

13:16 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन के समय कितनी करनी चाहिए परिक्रमा (Holika Dahan 2026)

होलिका दहन के समय उसकी 7 बार परिक्रमा करने का विधान है। वहीं इस समय होलिका की लकड़ी पर मौली (कच्चा सूत) बांधते हैं। इससे परिवार में संपन्नता और समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

12:59 (IST) 3 Mar 2026

राशि अनुसार होलिका दहन उपाय

ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की पवित्र अग्नि में अपनी राशि के अनुसार कुछ विशेष चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

https://www.jansatta.com/religion/holika-dahan-rashi-anusar-upay-what-to-offer-in-holika-dahan-according-to-your-zodiac-sign/4432181/

12:53 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन पर करें इन चीजों का दान (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

होली पर काले तिल, नारियल, चावल, गेहूं, जौ और रुपये का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से मांं लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। साथ ही सुख- समृद्धि जीवन में आती है।

11:25 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन पर करें नृसिंह भगवान की आरती ( Aarti of Lord Narasimha)

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।

पहली आरती प्रह्लाद उबारे,

हिरणाकुश नख उदर विदारे।

दूसरी आरती वामन सेवा,

बलि के द्वार पधारे हरि देवा।

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

तीसरी आरती ब्रह्म पधारे,

सहसबाहु के भुजा उखारे।

चौथी आरती असुर संहारे,

भक्त विभीषण लंक पधारे।

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

पांचवीं आरती कंस पछारे,

गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले।

तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा,

हरषि-निरखि गावें दास कबीरा।

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।

10:42 (IST) 3 Mar 2026

होलिका दहन के लिए संपूर्ण पूजन सामग्री (Holika Pujan Samagri)

  • कच्चा सूती धागा
  • नारियल
  • गुलाल 
  • रोली 
  • अक्षत 
  • धूप 
  • फूल 
  • बताशे 
  • नया अनाज
  • मूंग की साबुत दाल 
  • हल्दी का टुकड़ा 
  • एक कटोरी पानी 
  • हवन सामग्री
  • गुड़
  • चावल
  • मिठाई
  • फल
  • गेहूं का आटा
  • पुष्प माला
  • गाय का घी
  • सरसों का तेल
  • मिट्टी का दीपक
  • गाय के गोबर के उपले 
  • गंगाजल 
  • कपूर 
  • अगरबत्ती
  • 10:08 (IST) 3 Mar 2026

    होलिका दहन कहां और किस दिशा में करें? (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

    शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा सबसे मंगलकारी मानी जाती है। यदि यह संभव न हो, तो होलिका दहन दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) को छोड़कर किसी भी दिशा में कर सकते हैं। वहीं आपको बता दें कि पूजा के दौरान मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

    09:41 (IST) 3 Mar 2026

    जौ या गेहूं सेंकने की परंपरा (Holi 2026)

    होलिका दहन में नई फसल की बालियां अग्नि में सेंकने की परंपरा भी है। इसे आने वाले समय में समृद्धि और अच्छी पैदावार का संकेत माना जाता है।

    09:15 (IST) 3 Mar 2026

    गोबर के उपलों की माला होलिका दहन में क्यों चढ़ाई जाती है? (Holi 2026)

    होली पर गोबर के उपलों की माला चढ़ाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इसे शुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा के नाश और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इसे होलिका की अग्नि में डालना मंगलकारी माना जाता है।

    08:20 (IST) 3 Mar 2026
    होली पर बन रहे बुधादित्य और मालव्य राजयोग (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

    होली पर शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि में संचरण करके मालव्य राजयोग बना रहे हैं। वहीं बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य राजयोग बन रहा है।

    08:00 (IST) 3 Mar 2026

    होलिका दहन की अग्नि में डालें ये चीजें (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

    होलिका दहन की अग्नि में गेहूं और जौ की बालियां डालने से घर में धन- धान्य की वृद्धि होती है और सुख-शांति बनी रहती है।

    काले तिल डालने से शनि दोष और राहु-केतु का अशुभ प्रभाव कम होता है।

    चंदन की लकड़ी रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति देती है।

    होलिका दहन की अग्नि में हवन सामग्री डालने से वैवाहिक जीवन में सुख और समझ बढ़ाती है। इन उपायों से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

    07:30 (IST) 3 Mar 2026

    इस दिशा में प्रज्वलित करें दीपक (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

    होलिका दहन के दिन घर की उत्तर दिशा और ईशान कोण में एक-एक आटे का दीपक प्रज्वलित करें। क्योंकि वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा के स्वामी भगवान कुबेर हैं, जो धन और यश देते हैं, जबकि ईशान कोण के स्वामी गुरु ग्रह हैं, जो ज्ञान और समृद्धि के कारक माने जाते हैं।

    07:00 (IST) 3 Mar 2026

    होलिका दहन पर करें इन चीजों का दान (Holika Dahan Shubh Muhurat 2026)

    होली पर काले तिल, नारियल, चावल, गेहूं, जौ और रुपये का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से मांं लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। साथ ही सुख- समृद्धि जीवन में आती है।

    06:30 (IST) 3 Mar 2026

    होलिका दहन पर करें नृसिंह भगवान की आरती ( Aarti of Lord Narasimha)

    आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

    वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।

    पहली आरती प्रह्लाद उबारे,

    हिरणाकुश नख उदर विदारे।

    दूसरी आरती वामन सेवा,

    बलि के द्वार पधारे हरि देवा।

    आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

    तीसरी आरती ब्रह्म पधारे,

    सहसबाहु के भुजा उखारे।

    चौथी आरती असुर संहारे,

    भक्त विभीषण लंक पधारे।

    आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

    पांचवीं आरती कंस पछारे,

    गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले।

    तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा,

    हरषि-निरखि गावें दास कबीरा।

    आरती कीजै नरसिंह कुंवर की।

    वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।

    06:00 (IST) 3 Mar 2026

    होलिका दहन पूजा सामग्री (Holika Dahan 2026 Puja Samagri)

    कच्चा सूती धागा

    नारियल

    गुलाल पाउडर

    रोली

    अक्षत

    फूल

    गाय के गोबर उपले या फिर एक माला

    बताशा

    गेहूं और चने की बालियां

    गन्ना

    हवन सामग्री

    काले तिल

    गुलाल

    धूप

    23:30 (IST) 2 Mar 2026

    रंगवाली होली 2026 कब खेली जाएगी? (Holi 2026)

    साल 2026 में रंगवाली होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन पूरे देश में गुलाल और रंगों के साथ धूमधाम से होली का उत्सव मनाया जाएगा। होलिका दहन के अगले दिन इसे धुलंडी या धुलेटी के रूप में खेला जाता है। सुबह से ही लोग एक-दूसरे पर अबीर और गुलाल लगाकर खुशियां बांटते हैं। यह दिन प्रेम, भाईचारे और आपसी मेलजोल का प्रतीक माना जाता है।

    22:00 (IST) 2 Mar 2026

    होलिका दहन 2026 शहर और समय

    दिल्ली: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

    नोएडा: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

    मथुरा: शाम 6:20 से रात 8:50 तक

    भोपाल: शाम 6:24 से रात 8:50 तक

    लखनऊ: शाम 6:09 से रात 8:37 तक

    पटना: शाम 6:00 से रात 8:15 तक

    मुंबई: शाम 6:45 से रात 9:10 तक

    चंडीगढ़: शाम 6:25 से रात 8:55 तक

    शिमला: शाम 6:25 से रात 8:55 तक

    जयपुर: शाम 6:30 से रात 8:59 तक

    वाराणसी: शाम 6:02 से रात 8:58 तक

    रायपुर: शाम 6:11 से रात 8:38 तक

    बेंगलुरु: शाम 6:30 से रात 8:55 तक

    चेन्नई: शाम 6:22 से रात 8:47 तक

    हैदराबाद: शाम 6:50 से रात 8:32 तक

    21:30 (IST) 2 Mar 2026

    होलिका दहन पर कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

    ज्योतिषाचार्य के अनुसार, होलिका दहन के समय आप 3, 5, 7 या 11 परिक्रमा कर सकते हैं। परिक्रमा करते समय अपने गुरु और इष्ट देव का स्मरण करते हुए मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे पूजा का प्रभाव और भी अधिक फलदायी माना जाता है।

    21:00 (IST) 2 Mar 2026

    होलिका दहन की अग्नि में क्या-क्या डालें?

    होलिका दहन की पवित्र अग्नि में पान का पत्ता, नारियल, बताशा, लौंग, गुग्गल, कपूर, पीली सरसों और इत्र आदि डालना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मजबूत होता है।

    20:30 (IST) 2 Mar 2026

    होली का महत्व

    होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है, जैसा प्रह्लाद और होलिका की कथा में दिखाया गया है। होलिका दहन के माध्यम से बुराई का नाश होता है और भक्ति, सेवा, प्रेम तथा भाईचारे की भावना को बल मिलता है। इसके अगले दिन रंगों की होली खेलकर मित्र और परिवार के साथ अपने मन की मित्रता और अपनापन साझा किया जाता है। इस प्रकार, होलिका दहन की भक्ति से लेकर धुलेटी के रंगीन उत्सव तक, यह त्योहार हमें एकता, प्रेम और उत्साह की सीख देता है। इस वर्ष 4 मार्च 2026 को आयोजित होली के इन उत्सवों को अपने प्रियजनों के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाइए और इन पावन तिथियों का भरपूर आनंद लीजिए।

    20:00 (IST) 2 Mar 2026

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 तिथि कब से लगेगी?

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होगी और यह तिथि 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। इस बार ग्रहण और पूर्णिमा का चांद होने के कारण होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा। होलिका दहन के दिन होलिका की प्रतिमा का दहन किया जाता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

    18:10 (IST) 2 Mar 2026

    होली पर करें ये उपाय (Holi Upay 2026)

    होलिका दहन के समय एक नारियल, साबुत हल्दी की गांठ और एक सुपारी श्रद्धा से अग्नि में अर्पित करें। मान्यता है कि इससे धन संबंधी अड़चनें दूर होती हैं और रुका हुआ पैसा मिलने के योग बनते हैं।

    17:36 (IST) 2 Mar 2026

    होलिका दहन की पूजा विधि (Holika Dahan Puja Vidhi)

  • सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • शाम को होलिका की विधि-विधान से पूजा करें।
  • रोली, अक्षत, फूल, नारियल अर्पित करें।
  • अग्नि प्रज्वलित कर परिक्रमा करें।
  • गेहूं की बालियां या नारियल अग्नि में अर्पित करें।