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फाग उत्सवः मतवाले रंगों में सराबोर देवता और भक्त

हिमाचल प्रदेश में होली (Holi 2020) पर हमीरपुर जिले के सुजानपुर में तीन दिन का मेला लगता है जो राजा संसार चंद कटोच के वक्त से चलता आ रहा है। इसी तरह से पालमपुर में भी तीन दिन का मेला लगता है।

हिमाचल प्रदेश में होली पर हमीरपुर जिले के सुजानपुर में तीन दिन का मेला लगता है।

बीरबल शर्मा

हिमाचल प्रदेश में होली की मस्ती अनूठी ही होती है। यहां पर जहां कई जगह पर होली के मेले सजते हैं, वहीं कई जगहों पर देवी-देवता और भक्त एक साथ नाचते-झूूमते हैं। देश में मनाई जाने वाली होली से एक दिन पहले ही मंडी की होली का खूब रंग जमता है। पूर्णमासी के दिन यहां पर होली खेली जाती है। होली के मतवाले रंगों की बौछार करते हुए ऐतिहासिक सेरी मंच की ओर बढ़ते। चौहटा और सेरी बाजार में होली के मतवालों की टोलियां सुबह से ही एक-दूसरे पर रंग बिखेरती और होली के हुड़दंग में मस्त देखी जाती हैं। इसके पश्चात सारा शहर मानों सेरी पवेलियन में सिमट कर रह जाता है। सारा शहर जैसे पारिवारिक माहौल में सेरी के प्रांगण में जश्न मनाता है।

माधोराय संग खेली होली
शिवरात्रि के बाद राजदेवता माधोराय होली के दिन लोगों के बीच होली का जश्न मनाते हैं। मंडी में राजदेवता माधोराय की भागीदारी इस उत्सव को रियासत के राजा और प्रजा के रिश्तों की प्रगाढ़ता को उजागर करता है। माधोराय मंडी रियासत के राजा रहे हैं। मंडी की होली राजा और प्रजा के बीच आपसी सद्भाव और सौहार्द की प्रतीक है। मंडी की होली की खासियत यह है कि यहां महिलाएं भी बेखौफ होकर बाजार में होली खेलने आती हैं। राजदेवता माधोराय की भागीदारी तो रियासतकाल से ही होली में रही है। उस जमाने में मंदिर के प्रांगण में पीतल के बड़े बर्तनों में रंग घोला जाता था। राजा दरबारियों के साथ होली खेलता था। यही नहीं राजा घोड़े पर सवार होकर प्रजा के बीच भी होली खेलने जाता था।

माधोराय की जलेब के साथ होती है होली
दिन भर सेरी पवेलियन और मंडी की गलियों में होली खेलने के बाद राजदेवता माधोराय की जलेब निकलने के साथ ही मंडी की होली का यह जश्न समाप्त हो जाता है। राजदेवता माधोराय के मंदिर से होली खेलते हुए होली के मतवाले चौहटा बाजार होते हुए मोती बाजार, समखेतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार से वापस माधोराय के मंदिर पहुंचते हैं। इसके साथ ही रंगों का यह उल्लास पर्व संपन्न हो जाता है।

हिमाचल प्रदेश में होली पर हमीरपुर जिले के सुजानपुर में तीन दिन का मेला लगता है जो राजा संसार चंद कटोच के वक्त से चलता आ रहा है। इसी तरह से पालमपुर में भी तीन दिन का मेला लगता है। ऊना जिले के बाबा बड़भाग सिंह में तो कई दिन मेला चलता है, जिसमें पंजाब से आने वाले लाखों लोग भाग लेते हैं। यहां पर चरण गंगा है जिसमें नहाने से सारे रोग दूर हो जाते हैं।

इसी तरह से बिलासपुर के गुरु के लाहौर में होला व होली मनाई जाती है जिसमें पंजाब से भी आकर लोग भी शामिल होते हैं। कुल्लू जिले के मंगलौर में तो होली को फाग उत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसमें देवता की पालकी के साथ लोग पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हैं। पूरे इलाके के लोग इसमें शामिल होते हैं। प्रदेश के कई शहरों कुल्लू, सुंदरनगर आदि में तो तीन तीन दिन होली के रंग देखे जाते हैं। एक तरह से पूरा सप्ताह ही पहाड़ी प्रदेश देवभूमि हिमाचल में होली की धूम रहती है।  चंबा जिले में तो होली के नाम से एक कस्बा भी है जो रावी नदी किनारे मणीमहेश मार्ग पर खड़ा मुख के समीप है।

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