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धनतेरस 2017: दिवाली से दो दिन पहले ही क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार, जानिए

Dhanteras 2017 Puja Vidhi, Time, Muhurat: धनतेरस के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन धन और आरोग्य के लिए मां लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है।

Dhanteras 2017: दिवाली से दो दिन पहले क्यों मनाया जाता है धनतेरस।

इस वर्ष दिवाली 19 अक्टूबर की है, इस हिसाब से धनतेरस सा धनवंतरी दिवस या जयंती 17 अक्टूबर 2017 यानि मंगलवार को है। इस दिन बाजारों में बहुत भीड़ होती है लेकिन इसी दिन उनकी रौनक देखने को मिलती है। कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है। दिवाली भारत का प्रमुख त्योहार है ये त्योहार पंचदिवसीय होता है। इस दिन शाम के दिन अवश्य ही घर में दीपक जलाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी इससे घर में प्रवेश करती हैं लेकिन इसके साथ घर से नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और खुशियों का माहौल आता है। दिवाली का सबसे पहला दिन होता है धनतेरस का, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन धन और आरोग्य के लिए मां लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसके अलावा और भी कारण हैं जिसकी वजह से धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धनवंतरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धनवंतरी चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। इस दिन लोग गणेश और लक्ष्मी को घर लाया जाता है। इस दिन लोग किसी को उधार नहीं देते हैं और ना ही लेते हैं। इस दिन धन की वृद्धि के लिए लोग नई वस्तुएं लेते हैं।

इस दिन लक्ष्मी के साथ-साथ मां धन के देवता कुबेर और यमराज की पूजा भी की जाती है। ऐसा माना जाता है इस दिन अगर मां लक्ष्मी घर आती हैं तो वो हमेशा के लिए रुक जाती हैं। इसलिए इस दिन विशेष पूजा का महत्व होता है। इस दिन यमराज की पूजा का महत्व इसलिए है क्योंकि दिवाली के समय अधिकतर प्रदोष काल का समय होता है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार इस दिन जो यमराज को दीपदान करता है उसकी आकाल मृत्यु नहीं होती है।

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