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दिल्ली के इस अतिसुरक्षित इलाके में है 100 साल पुराना काली माता का मंदिर

नवरात्रों के दौरान यहां पर विशेष आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन माता का भंडारा होता है और विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है।

दिल्ली के इस स्थान पर माता की मूर्ति मिलने के कारण काली भैरों के मंदिर की स्थापना की गई।

भारत की राजधानी दिल्ली में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके बारे हर कोई नहीं जानता है लेकिन उनकी प्रख्याति वहां के आस-पास के इलाकों में बहुत अधिक है। ऐसे ही दिल्ली का एक ऐसा मंदिर है जहां पिछली चार पीढ़ियों से एक राजपूत परिवार सेवा कर रहा है। दिल्ली के सबसे सुरक्षित और सबसे वीवीआईपी इलाके में काली भैरों का ये मंदिर स्थित है। प्रधानमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर स्थित नेहरु पार्क के विनय मार्ग की जहां पर पिछले 100 सालों से माता का ये मंदिर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना राजस्थान के एक राजपूत परिवार के व्यक्ति ने की थी। अंग्रजों के राज के समय इस जगह को हसनपुर कहा जाता था और इस जगह आबादी नहीं रहती थी और सुनसान होने के कारण यहां जंगल हुआ करता था। यहां माता की मूर्ति मिलने के कारण इस जगह काली भैरों के मंदिर की स्थापना की गई।

राजस्थान के सीकर जिले के गांव गड़ला कला के मूल निवासी स्वर्गीय सोहन लाल ने इस मंदिर को बनवाया था। आज इस मंदिर का रख-रखाव उनके पोते करते हैं। समुद्र सिंह ने बताया कि उनके दादा सोहन लाल को एक सपना आया था। इस जगह पर एक मूर्ति है, इसके बाद खुदाई करने के बाद पता यहां से एक छोटी से माता की मूर्ति निकली, जिसके बाद उसे वहीं स्थापित कर दिया गया और एक छोटे मंदिर की स्थापना कर दी गई। इसके बाद से इस मंदिर माता की कृपा बनी हुई है। यहां आने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसलिए आज सिर्फ आसपास के ही नहीं बल्कि दूर के लोग भी यहां माता के दर्शन करने आते हैं। हर रविवार के दिन इस मंदिर में भंडारा होता है और नवरात्रों में तो इस मंदिर की रौनक देखने योग्य होती है।

नवरात्रों के दौरान यहां पर विशेष आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन माता का भंडारा होता है और विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है। इस मंदिर की मान्यता बहुत अधिक है। साधारण लोगों से लेकर इस मंदिर में वीवीआईपी लोग भी दर्शन करने आते हैं। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समयकाल में राजस्थान के दौसा के तत्कालीन विधायक बंसी लाल ने यहां देवी की बड़ी प्रतिमा को स्थापित करवाया। उसके बाद इस मंदिर में मां काली की, भैरों बाबा की मूर्त भी स्थापित करवाई गई। मंदिर परिसर में ही शिव परिवार और नवग्रह का मंदिर भी है। इस मंदिर के लिए मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मनोकामना को माता पूरा करती हैं।

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