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तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से मिलकर बना है पंचांग, जानिए इसका महत्व

पंचांग में एक दिन को कुल आठ पहरों में बांटा गया है। इस हिसाब से एक पहर तीन घंटे की होता है। वहीं, पंचांग में आधा मिनट को एक पल का दर्जा दिया गया है।

Author नई दिल्ली | May 21, 2018 2:23 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग पंचांग के परामर्श पर ही शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखे बिना नए कार्य की शुरुआत करने से उसमें असफलता मिलने का खतरा बना रहता है। सीधे शब्दों में कहें तो पंचांग हिंदू समाज का कैलेंडर है। पंचाग की मान्यता पूरे देश में है। हालांकि कुछ राज्यों में इसे अलग रूप में माना जाता है। मालूम हो कि पंचांग की मान्यता भारत समेत नेपाल में भी है। पंचांग, दो शब्दों पंच और अंग से मिलकर बना हुआ है जिसका अर्थ है पांच अंग यानी पंचांग। यदि पंचांग के पांच अंगों या भागों की बात करें तो ये हैं- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। चलिए विस्तार से जानते हैं पंचांग के बारे में।

बता दें कि पंचांग में धाराओं का विशेष महत्व है। इसमें तीन धाराएं होती हैं- चंद्र आधारित, नक्षत्र आधारित और सूर्य आधारित। पंचांग में भी 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 15 दिनों के दो पक्षों में बंटा होता है, जिसे शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष कहा जाता है। मालूम हो कि विक्रम संवत से 12 महीने का एक साल और 7 दिन का एक सप्ताह होने का प्रचलन शुरू हुआ। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उसी आधार पर पंचांग के 12 महीनों का नामकरण हुआ है। वहीं, चन्द्रमा की कलाओं के बढ़ने और घटने के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित किए जाते हैं।

पंचांग में एक दिन को कुल आठ पहरों में बांटा गया है। इस हिसाब से एक पहर तीन घंटे की होता है। पंचांग में आधा मिनट को एक पल का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही एक पल में चौबीस क्षण होते हैं। चंद्रमा की एक कला तिथि कहलाती है। एक सूर्योदय से दूसरे दिन के सूर्योदय की अवधि को वार कहते हैं। ताराओं के समूह को नक्षत्र कहा जाता है। सूर्य और चन्द्रमा के संयोग से योग बनता है। वहीं, तिथि के आधे भाग को करण कहा जाता है।

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