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कितनी सटीक है चाणक्य नीति दुश्मन देश को परास्त करने की

चाणक्य ने अपने शत्रु को पराजित करने का सबसे बेस्ट तरीका ये बताया है कि दुश्मन पर कभी भी पहला वार हथियार से ना करें। पहले अपने शत्रु को कूटनीति में फसाएं यानी उसकी शक्तियों और सहयोगियों को उससे दूर करें। जब शत्रु चारों तरफ से अलग-थलग पड़ जाए तब उस पर भरपूर प्रहार करना चाहिए।

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भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। लेकिन, देश को यहां तक पहुंचने और तरक्की की राह पर अग्रसर होने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। विकास की दिशा में बढ़ते हिंदुस्तान को दुश्मनों ने पीछे धकेलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। भारत के दुश्मनों ने कई मोर्चों पर आतंकवाद और उग्रवाद के जरिए छद्म-युद्ध भी छेड़े और भारत ने उसका सामना हथियार और कूटनीति से जबरदस्त तरीके से दिया है। लेकिन, भारत को ये सारी चीजें विरासत में मिली हैं। इस धरती पर चाणक्य जैसे महा-विद्यान हुए जिन्होंने कूटनीति और सामरिक नीति में दुश्मनों को परास्त करने की अनेक युक्तियां बताईं। जो इस प्रकार है…

– चाणक्य ने अपने शत्रु को पराजित करने का सबसे बेस्ट तरीका ये बताया है कि दुश्मन पर कभी भी पहला वार हथियार से ना करें। पहले अपने शत्रु को कूटनीति में फसाएं यानी उसकी शक्तियों और सहयोगियों को उससे दूर करें। जब शत्रु चारों तरफ से अलग-थलग पड़ जाए तब उस पर भरपूर प्रहार करना चाहिए।

– चाणक्य कहते हैं कि शत्रु का सबसे घातक हथियार होता है उकसाना। शत्रु इसी हथियार का इस्तेमाल करके आपको उकसाने की कोशिश करेगा। लेकिन क्रोध में शक्ति और विवेक आधी हो जाती और शत्रु आपकी कमजोरी का फायदा उठाता है। इसलिए शत्रुओं के उकसावे पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए बल्कि सही वक्त का इंतजार करना चाहिए।

– आचार्य चाणक्य ने कहा है कि दुष्ट के साथ कितना ही अच्छा व्यवहार क्यों न किया जाए वह अपना स्वभाव नहीं बदल सकता। सांप का जहर तो केवल उसके दांतो में होता है, बिच्छू का विष पूंछ में लेकिन दुष्ट के तो अंग-अंग में जहर होता है इसलिए दुष्ट पर कभी भरोसा न करें। क्योंकि दुष्ट कभी मित्र नहीं हो सकता। दुष्ट के साथ उसी प्रकार व्यवहार करना चाहिए जैसे एक विषैले सांप के साथ किया जाता है यानी उसका फन कुचल देना चाहिए।

– आचार्य की एक नीति यह भी कहती है कि अपने शत्रु से कभी घृणा मत करो। शत्रु से घृणा करने पर आप उसके बारे में सोचने-समझने की शक्ति खो देते हैं। इससे आप केवल उसकी कमजोरी देख पाते हैं ताकत नहीं। इसलिए शत्रु को एक मित्र की तरह देखें और उसकी हर बातों की जानकारी रखें ताकि युद्ध के हालात में शत्रु के पास बच निकलने का कोई भी रास्ता न बचे।

– चाणक्य नीति में कहा गया है कि रोग, सांप और शत्रु इन्हें घायल करके ना छोड़ें। रोग का पूरा उपचार नहीं हुआ तो वह फिर से और ज्यादा प्रभाव के साथ उभर सकता है। सांप को घायल छोड़ दिया तो वह और भी घातक हो सकता है। शत्रु अगर घायल होकर बच गया तो वह अंदर ही अंदर बदले की आग में जलता है और फिर हमला कर सकता है इसलिए शत्रु पर वार करो तो ऐसा कि वह फिर उठ ना सके।

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