दिवाली पर लक्ष्मी गणेश की मूर्ति लाने से पहले इन बातों का रखें ख्याल, मामूली चूक पड़ सकती है भारी

गणेश जी की मूर्ति में सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं है तो वह मूर्ति ना खरीदें। कहा जाता है कि मोदक को हाथ में लिए गणेश जी की मूर्ति सुख और संपत्ति देती है।

Ganesh Lakshmi
सबसे अहम बात ये है कि पूजा के वक्त लक्ष्मी जी के दाहिने स्थान पर गणेश जी को बिठाएं और वाएं स्थान पर विष्णु जी को बिठाएं। (फोटो सोर्स-@Rituraj)

देशभर में दिवाली की धूम है और सभी लोग इस त्यौहार को मनाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इस दिन भगवान गणेश और लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि जब हम गणेश-लक्ष्मी को घर लाएं तो कुछ अहम बातों का ध्यान रखें। गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति को खरीदने से पहले इन बातों पर ध्यान दें।

धार्मिक रीति के हिसाब से दिवाली पर हमेशा बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति लेनी चाहिए, इसे शुभ माना जाता है और इससे धन लाभ होता है। इसके अलावा उनके जनेऊ, सूंड, वाहन और अस्त्र शस्त्र का भी ध्यान रखना चाहिए।

उनकी मूर्ति में सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं है तो वह मूर्ति ना खरीदें। कहा जाता है कि मोदक को हाथ में लिए गणेश जी की मूर्ति सुख और संपत्ति देती है।

ये बात भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि गणेश जी की मूर्ति में चूहा भी हो। अगर मूर्ति में गणेश जी का वाहन चूहा नहीं है तो दोष लगता है।

इसके अलावा सबसे अहम बात ये है कि पूजा के वक्त लक्ष्मी जी के दाहिने स्थान पर गणेश जी को बिठाएं और वाएं स्थान पर विष्णु जी को बिठाएं। कहा जाता है कि जब तक सही तरीके से पूजन ना किया जाए तो फल नहीं मिलता है।

जिस जगह पर पूजा की जा रही है, वहां लक्ष्मी जी की एक साथ दो मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। ऐसा करने से गृह कलेश बढ़ता है। लक्ष्मी जी को कमल का सिंहासन पसंद है, अगर मूर्ति खरीदने जा रहे हैं तो कोशिश करें कि कमल के सिंहासन वाली लक्ष्मी जी की मूर्ति ही खरीदें।

दिवाली का शुभ मुहूर्त: दिवाली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 4 नवंबर को 06.03 बजे से हो चुकी है और इसकी समाप्ति 5 नवंबर को 02:44 AM पर होगी। दिवाली पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल का माना गया है। जो शाम 06:09 बजे से शुरू हो रहा है और इसकी समाप्ति रात 08:04 बजे होगी। अगर आप रात में दिवाली की पूजा करना चाहते हैं तो लक्ष्मी पूजा के लिए निशिता काल मुहूर्त रात 11:39 बजे से शुरू होगा और इसकी समाप्ति 5 नवंबर को 12:31 AM पर होगी।

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