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Happy Ashtami 2019: ये है अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा-विधि, जानें व्रत कथा

Happy Ashtami 2019: मार्केण्डेय पुराण के अनुसार देवी दुर्गा ने शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की की थी। जिसके बाद शिव ने महागौरी को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।

Author नई दिल्ली | April 13, 2019 1:39 PM
Happy Ashtami 2019: माता महागौरी।

Happy Ashtami 2019: नवरात्रि के आठवें दिन यानि अष्टमी को देवी दुर्गा की महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी इस बार 13 अप्रैल 2019 को मनाई जाएगी। शास्त्रों में अष्टमी पूजा का नवरात्रों मे आठवें दिन यानि विशेष महत्व और विधान बताया गया है। साथ ही इस दिन व्रत रखने का भी खास महत्व है।

मार्केण्डेय पुराण के अनुसार देवी दुर्गा ने शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की की थी। जिसके बाद शिव ने महागौरी को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यही नहीं, ऐसी मान्यता है कि अगर कोई भक्त महागौरी की उपासना सच्चे दिल से करता है, तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं।

पूजा विधि

  • सबसे पहले अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान से निवृत हो लें।
  • माता की प्रतिमा को फूल से अच्छे से सजाएं और उनका सोलह श्रृंगार करें।
  • महागौरी की पूजा पीले कपड़े पहनकर करना शुभ माना गया है। इसलिए इनकी पूजा पीले कपड़े पहनकर करें।
  • माता महागौरी की पूजा में लाल फूल का प्रयोग करना शुभ होता है। इसलिए इन्हें लाल फूल ही अर्पित करें।
  • फिर माता के सामने दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें।
  • इसके बाद महागौरी देवी को को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं और उनके मंत्रों का जाप करें।
  • मंत्र है- “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।” “ॐ नवनिधि गौरी महादैव्ये नम:।” “ॐ महागौर्य: नम:।”
  • महागौरी की उपासना करने से ज्यादा शुभफल प्राप्त होता है।
  • अष्टमी के दिन देवी महागौरी को नारियल का भोग लगाएं।
  • मान्यता है कि ऐसा करने से मनोकामना जल्द ही पूरी होती है।

कथा

देवी भागवत पुराण में देवी दुर्गा की आठवीं स्वरूप महागौरी की कथा का रोचक वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार देवी नें शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। जिस कारण इनका शरीर काला पड़ गया। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं। तब देवी बिजली के जैसा अत्यंत कांतिमान सफेद रंग की हो जाती हैं। कहते हैं कि तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।

देवी महागौरी से संबंधित एक दूसरी कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार, एक सिंह काफी भूखा था, वह भोजन की तलाश में उस स्थान पर पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रही थीं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गई लेकिन वह देवी की तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमजोर हो गया।

देवी जब तपस्या से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आ गई। फिर माता उस शेर को से अपना सवारी बना लेती हैं। क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी। इसलिए देवी गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

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