दिव्य धाम की सीरीज में आज हम बात करने जा रहे हैं महाराष्ट्र प्रदेश के पुणे जिले में स्थित डुल्या मारुति मंदिर के बार में यह मंदिर महाराष्ट्र के सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक हनुमान मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और माना जाता है कि इसका निर्माण 17वीं शताब्दी के आरंभ में हुआ था। मंदिर की पहचान इसकी प्राचीन काले पत्थर की हनुमान प्रतिमा और उससे जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण है। आइए जानते हैं इतिहास और महत्व…
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मंदिर का इतिहास
इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना संत समर्थ रामदास से जुड़ी मानी जाती है। ‘डुल्या’ शब्द का अर्थ है ‘झूलना’ या ‘हिलना’। लोककथाओं के मुताबिक, वर्ष 1761 में हुए तीसरे पानीपत युद्ध में मराठों की हार की खबर मिलने पर मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा शोक में हिलने लगी थी। इसी घटना के बाद इस मंदिर को “डुल्या मारुति” के नाम से जाना जाने लगा। हालांकि इस कथा का ऐतिहासिक प्रमाण सीमित है, लेकिन यह मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय है।
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पुणे के ऐतिहासिक मारुति मंदिरों में डुल्या मारुति का विशेष स्थान माना जाता है। कई स्रोत इसे शहर के संरक्षक देवस्थानों में भी शामिल बताते हैं। मंदिर की लगभग पांच फीट ऊंची काले पत्थर की प्रतिमा पश्चिमाभिमुख है और मंदिर का अधिकांश ढांचा पत्थर से निर्मित है।
कैसे पहुंचे मंदिर?
डुल्या मारुति मंदिर पुणे शहर के बीच में स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है। मंदिर से पुणे रेलवे स्टेशन लगभग 2 किलोमीटर दूर है। वहीं पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट मंदिर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं आपको बता दें कि लक्ष्मी रोड, गणेश पेठ और नाना पेठ क्षेत्र से ऑटो, टैक्सी और स्थानीय बसों के जरिए आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
