हनुमान जयंती हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। इस साल हनुमान जंयती का पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। वहीं दिन भक्त हनुमान जी की विशेष पूजा- अर्चना करते हैं। साथ ही पूजा के बाद बजरंगबली की आरती का जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं हनुमान जी की आरती के बारे में…
हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
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