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हनुमान जयंती 2017: 120 साल बाद बना यह विशेष योग, जानिए क्या हैं मान्यताएं

Hanuman Jayanti 2017: ज्योतिषियों के अनुसार में आज का दिन एक विशेष दिन है। जिन व्यक्तियों पर साढ़ेसाती चल रही है उस व्यक्ति के लिए आज का दिन पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

ज्योतिषियों के अनुसार हनुमान जी को दीपदान अतिप्रिय है। (Source: Wikimedia Commons)

धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी को शिवजी का 11वां अवतार माना जाता है। आज हनुमान जयंती है और कहा जा रहा है कि करीब 120 सालों के बाद इय जयंती पर खास संयोग बन रहा है। आज हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों पर खास अनुकम्पा होगी। ज्योतिषियों के अनुसार में आज का दिन एक विशेष दिन है। जिन व्यक्तियों पर साढ़ेसाती चल रही है उस व्यक्ति के लिए आज का दिन पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। आज के दिन देशभर के मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दिन विशेष पूजा- पाठ किया जाता है। इस दिन माता अंजनी के गर्भ से हनुमान जी ने जन्म लिया था, इसी कारण से इस दिन का महत्व अधिक है।

ज्योतिषियों के अनुसार हनुमान जी को दीपदान अतिप्रिय है। हनुमान जी को खुश करने के लिए के दीपदान किया जाता है। हनुमान जी को खुश करने के लिए छह स्थलों( प्रमोद के अवसर पर, ग्रहों के निमित,देव प्रतिमा के आगे, ग्रहों में और चौराहों) पर दीप जलाना चाहिए। कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि संकटों का नाश करने के लिए हनुमान जी के निकट गणेश जी के लिए लिए दीपदान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में खुशी आती है। वहीं अगर आप चौराहों पर दीपदान करते हैं तो व्याधि नाश होता है और दुष्ट ग्रहों से आपकी रक्षा होती है।
कैसे करें पूजा- हनुमान जी को खुश करने के लिए इस दिन विशेष रुप से पूजा करनी चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार पूजा करने के लिए पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे। याद रहे कि पूजा करने समय लाल आसन पर ही बैठें। पूजा करते समय लाल धोती और ऊपर वस्त्र चादर, दुपट्टा आदि डालना अच्छा बताया गया। हनुमान जी की मूर्ति के सामने सरसों या तिल के तेल का दीप एवं धूप जलानी चाहिए। साथ ही द्वादश नामों का स्मरण 151 बार करना चाहिए।

धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी अतुलनीय पराक्रम के धनी हैं। कहा जाता है कि एक दिन माता अंजना वन में फल गई थीं। घर पर हनुमान जी अकेले थे। उन्हें भूख लगी। भूख लगने पर बालक हनुमान जी ने सूर्य के लाल रंग को ही फल समझ लिया और उड़ते-उड़ते उनके पास पहुंच गए। उस दिन अमावस्या में सूर्यदेव पर राहु ग्रहण लगने वाला था। लेकिन ऐसा होता उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य के रथ के ऊपरी भाग पर विराजित राहु को छू लिया। डर के मारे वह भाग कर इंद्रदेवता के पास पहुंचा।

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