Hanuman Jayanti 2026: शास्त्रों में हनुमान जी को श्री राम का परम भक्त के साथ सबसे ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है। उन्हें शक्ति, भक्ति और साहस का अद्वितीय प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा करने से साधकों को रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ ही वह अपने जीवन में हमेशा सही रास्ते में पूरे साहस और आत्मविश्वास के साथ चल सकता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में हनुमान जी के कई आश्चर्यजनक कर देने वाले कार्यों का वर्णन किया गया है। ये केवल पौराणिक कथाएं ही नहीं है बल्कि ये आपके जीवन में गहरे संदेश भी देते हैं। आइए जानते हैं हनुमान जयंती के मौके पर बजरंगबली से संबंधित 5 पौराणिक घटनाओं के बारे में…
आज के दौर में अधिकतर लोग मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में हनुमान जी ये शक्तियां आपके जीवन में सकारात्मक सोच को विकसित कर सकती है। इन कार्यों को जानकर आप ये जान सकते हैं जीवन के हर एक असंभव चीज को किया जा सकता है। आइए जानते हैं हनुमान जी की वो 5 अद्भुत शक्तियां, जो न सिर्फ चौंकाती हैं बल्कि जीवन को नई दिशा भी देते हैं।
अद्भुत शक्ति – पर्वत उठाना
रामायण के युद्ध कांड (Yuddha Kanda) में इस कथा का उल्लेख मिलता है। जब मेघनाद के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। उस समय लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था से निकालने के लिए कई तरह के जतन किए गए। लक्ष्मण जी पर मृत्यु के बादल मंडराने लगते हैं। मूर्छित पड़े अपने भाई को देखकर भगवान राम व्याकुल हो जाते हैं। तब ऐसे में सुषेण वैद्य को बुलाया जाता है। जो लक्ष्मण जी को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने के लिए कहते हैं। हनुमान जी इस कार्य को करने का बीड़ा उठाते हैं। ऐसे में जब हनुमान जी संजीवनी बूंटी लेने पहुंचते हैं तो हर एक पौधा एक जैसा लगता है। ऐसे में वह पूरा द्रोणागिरी पर्वत ही उठा लाते हैं। इस कथा से हमें ये शिक्षा मिलती हैं कि शक्ति केवल बल ही नहीं, बल्कि संकट में तेज निर्णय लेने और साहस का प्रतीक भी है।
असाधारण गति – समुद्र पार करना
वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में हनुमान के समुद्र पार को लेकर पुरी कथा लिखी हुई है। लंका पहुंचने के लिए हनुमान जी ने सिर्फ एक छलांग लगाई थी। कथा के अनुसार, महेन्द्र पर्वत के विशाल और समतल प्रदेश में, जहां बड़े-बड़े गजराज विचरण कर रहे थे। वहां खड़े हनुमान जी जलाशय में स्थित एक विशाल हाथी के समान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने सूर्य, इंद्र, पवन और ब्रह्मा सहित सभी देवताओं को प्रणाम किया और समुद्र लांघने का दृढ़ संकल्प लिया। संकल्प के साथ ही उनका शरीर विराट रूप धारण कर गया और वे अग्नि के समान तेजस्वी दिखने लगे।
उन्होंने अपने साथियों से कहा, “हे मित्रों! जैसे श्रीराम का बाण वायु की गति से चलता है, वैसे ही मैं तीव्र वेग से लंका जाऊंगा और माता सीता की खोज करूंगा। यदि वहां भी उनका पता नहीं चला, तो रावण को बांधकर प्रभु श्रीराम के चरणों में ले आऊंगा। आप निश्चिंत रहें, मैं सीता जी के साथ ही लौटूंगा, अन्यथा पूरी लंका को ही उठा लाऊंगा। यह कहकर हनुमान जी आकाश में उछले और अद्भुत वेग से लंका की ओर प्रस्थान कर गए। इस कहानी से ये सिद्ध होता है कि कठिन मार्ग भी धैर्य, साहस और भरोसे से आसान बन जाता है।
अदृश्य होने की शक्ति – लंका दहन
रामायण के अनुसार, जब हनुमान जी लंका पहुंचे तो सबसे पहले उनके कानों में श्रीराम नाम की ध्वनि पड़ी। यह सुनकर वे आश्चर्यचकित हुए और खोजते-खोजते उनकी भेंट विभीषण से हुई, जो रामभक्त थे और रावण की नीतियों के विरोधी थे। आगे अशोक वाटिका में उन्होंने माता सीता को दयनीय अवस्था में देखा, जहां त्रिजटा नामक सेविका उन्हें सांत्वना दे रही थी।
हनुमान जी सूक्ष्म रूप में वृक्ष पर बैठकर उनकी बातचीत सुनने लगे। त्रिजटा ने अपने स्वप्न का वर्णन किया, जिसमें उसने लंका को जलते हुए देखा था और बताया कि यह रावण के अंत का संकेत है। यह सुनकर सीता जी को आशा मिली। हनुमान जी ने भी इस संकेत को समझा और सीता जी से मिलकर उन्हें श्रीराम की अंगूठी दी, जिससे उनका विश्वास दृढ़ हुआ।
इसके बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में उत्पात मचाया। मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से वे स्वयं को बंधन में आने दिया और रावण की सभा में पहुंचे। वहां विभीषण के समझाने पर रावण ने उन्हें मारने के बजाय उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। इसी अग्नि से हनुमान जी ने पूरी लंका को जला दिया और प्रभु की इच्छा पूर्ण की। उन्होंने अपने अदृश्य रूप और बुद्धि का प्रयोग करके दुश्मनों को परास्त किया।
शक्ति और भक्ति का मेल
हनुमान जी का सबसे बड़ा बल उनकी भक्ति मानी जाती है, जो श्री राम के प्रति थी। वह हर एक कठिन परिस्थितियों से लेकर कोई भी कार्य करने से पहले अपने प्रभु श्री राम का जरूर ध्यान करते थे। वह अपनी भक्ति के द्वारा कठिन परिस्थियों में भी सफलता हासिल कर लेते हैं। इससे हमें ये पता चलता है कि असली शक्ति केवल शरीर की नहीं बल्कि विश्वास और भक्ति में भी हो सकती है।
संकट मोचन – संकट में सहायता
हनुमान जी को संकट मोटन कहा जाता है। वह अपने भक्तों की हमेशा सहायता करते हैं। जिस तरह से हनुमान जी ने अपने परम प्रिय राम जी की सहायता की थी। उन्होंने मां सीता के बारे में लंका जाकर पता लगाया था। हनुमान जी युद्ध के मैदान से लेकर जीवन में आने वाली हर संकट में साथ देते है। हनुमान चालीसा के इस श्लोक में इस बारे में भी बोला भी गया है।
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई, जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त ना धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
इस श्लोक का अर्थ है कि चारों युग यानी सत्य, त्रेता, द्वापर, कलियुग में प्रसिद्ध है। आपके तेज से पूरा संसार प्रकाशित और गौरवान्वित है। जो भी व्यक्ति हनुमान जी का सच्चे मन से याद करता है, तो वह हर तरह के दुख और संकट से दूर रहता है।
जीवन के अंत समय में वह अपने भक्तों को श्री राम का धाम दिलाते हैं और अगले जन्म में भी हरि का भक्त बनता है।
जो व्यक्ति केवल हनुमान जी की भक्ति करता है और अन्य देवताओं में मन नहीं लगाता, उसे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै ॥
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
इस श्लोक का अर्थ है कि जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं। चाहे समस्या कितनी ही कठिन या जटिल क्यों न हो, हनुमान जी स्वयं अपने भक्त की सहायता करते हैं और उसे हर विपत्ति से बाहर निकालते हैं।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
