Hanuman Jayanti 2026, Hanuman Chalisa Katha: आज हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। देशभर में हनुमान मंदिरों पर भक्तों का तांता लगा हुआ है। हनुमान जयंती पर बजरंगबली की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण से लेकर रामायण का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। आज भी किसी भी प्रकार के संकट आने पर हनुमान चालीसा के पाठ की सलाह पंडित या फिर घर के बड़े लोग देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलयुग में हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले जीवंत देवता हैं। जीवन की हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा के पाठ से संभव माना गया है। इसका नियमित रूप से पाठ करने से हर एक चुनौती, परेशानियां समाप्त हो सकती है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा, वीर हनुमान को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल और प्रभावशाली स्तुति मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसीदास जी से हनुमान चालीसा कब और किन परिस्थितियों में लिखी थी। इसको लेकर एक पौराणिक कथा काफी प्रचलित है। आइए जानते हैं इसके बारे में…
बता दें कि तुलसीदास जी ने हनुमान जी की स्तुति को लेकर कई रचनाएं की हैं, जिनमें हनुमान बाहुक, हनुमान अष्टक और हनुमान चालीसा प्रमुख मानी जाती है।
अखबर की जेल में 40 दिनों में लिखी गई थी हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा की रचना से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भी है। यह उस समय की बात है जब भारत पर मुगल सम्राट अकबर का शासन था। एक दिन एक महिला ने पूजा से लौटते समय तुलसीदास जी के चरण स्पर्श किए। उन्होंने उसे अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया। यह सुनकर वह महिला रोने लगी और बताने लगी कि उसके पति का अभी-अभी निधन हो गया है, और तुलसीदास जी से उन्हें जीवित करने की प्रार्थना करने लगी। तुलसीदास जी अपने आशीर्वाद को लेकर आश्वस्त रहे और उन्होंने सभी को राम नाम का जाप करने के लिए कहा। सभी के जप के प्रभाव से वह मृत व्यक्ति पुनः जीवित हो उठा।
जब यह घटना अकबर तक पहुंची, तो उसने तुलसीदास जी को दरबार में बुलाकर उनसे चमत्कार दिखाने को कहा। तुलसीदास जी ने विनम्रता से कहा कि वे कोई चमत्कारी साधु नहीं, बल्कि केवल भगवान राम के भक्त हैं। यह सुनकर अकबर क्रोधित हो गया और उसने उन्हें कारागार में बंद करवा दिया। तुलसीदास जी ने वहां भी अपनी आस्था बनाए रखी और राम नाम का जाप करते हुए हनुमान चालीसा की रचना की तथा 40 दिनों तक उसका निरंतर पाठ किया।
कथा के अनुसार, 40वें दिन एक अद्भुत घटना घटी। हजारों बंदरों ने अकबर के महल पर हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित घटना से अकबर चकित रह गया और उसने भक्ति की शक्ति को समझा। उसने तुरंत तुलसीदास जी से क्षमा मांगी, उन्हें कारागार से मुक्त किया और सम्मानपूर्वक विदा किया। इसके बाद अकबर ने उनसे मित्रता भी निभाई।
मान्यता है कि हनुमान जी ने तुलसीदास जी को आशीर्वाद दिया कि कलयुग में जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से हनुमान चालीसा का पाठ करेगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।
तुलसीदास की रचनाएं
बता दें कि तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा के अलावा रामललानहछू, वैराग्य संदीपनी, रामाज्ञाप्रश्न, जानकी-मंगल, रामचरितमानस, सतसई, पार्वती-मंगल, गीतावली, विनय-पत्रिका, कृष्ण-गीतावली, बरवै रामायण, दोहावली और कवितावली (बाहुक सहित) आदि रचनाएं की।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
