Hanuman Janmotsav 2026 Bhog: हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वानर राज केसरी और माता अंजना के पुत्र हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना गया है। देशभर में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण के साथ-साथ उनको प्रिय भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से सुख-समृद्धि,सुख-संपदा, मान-सम्मान की बढ़ोतरी हो सकती है। श्री राम की भी कृपा प्राप्त हो सकती है। आइए जानते हैं हनुमान जी की कृपा पाने के लिए हनुमान जन्मोत्सव पर उन्हें चढ़ाएं ये चीजें…
इमरती या जलेबी
हनुमान जी को जलेबी और इमरती अति प्रिय है। हनुमान जी को ये चढ़ाने से आर्थिक स्थिति अच्छी हो सकती है। इसके साथ ही सारे कष्टों से निजात मिलने के साथ कई मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है।
बूंदी के लड्डू
हनुमान जी को बूंदी के लड्डू या फिर खुली बूंदी चढ़ाने से वह अति प्रसन्न होते हैं। इनकी कृपा से ग्रह की बाधाएं दूर होने के साथ बाल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति हो सकती है।
बेसन के लड्डू
हनुमान जी को बेसन के लड्डू भी अति प्रिय है। इसे उन्हें चढ़ाने से वह अति प्रसन्न होते हैं। इससे साहस, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। बजरंगबली को ये चढ़ाने से हर संकट से निजात मिल सकती है। भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
पान का बीड़ा
हनुमान जी को जन्मोत्सव के दिन मीठा पान का बीड़ा अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से शत्रु बाधा से मुक्ति मिल जाती है। मंगल दोष, शनि दोष के दुष्प्रभाव कम होने से लेकर करियर में तरक्की हो सकती है।
भुने हुए चने और गुड़
हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी को भुने चने के साथ गुड़ का भोग लगाना चाहिए। इसे शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसका भोग लगाने से भक्तों को मंगल दोष,शनि दोष के कुंडली में दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। आपके कामों में आ रही बाधाएं दूर हो सकती है। सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है।
हनुमान जी को ऐसे लगाएं भोग
हनुमान जन्मोत्सव के दिन स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद विधिवत पूजा करने के साथ घी या सरसों का दीपक जलाएं। चमेली में सिंदूर मिलाकर लगाएं। इसके बाद उन्हें भोग अर्पित करें। फिर जल चढ़ाने के साथ हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। अंत में आरती कर लें।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
