ताज़ा खबर
 

Hanuman Aarti, Chalisa, Bhajan: मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से संकट होते हैं दूर, जानिए इनके भजन, चालीसा और आरती

Hanuman Ji Ki Aarti, Bhajan, Chalisa, Photo: मंगलवार (Tuesday Aarti) के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने के हनुमान चालीसा का जरूर करें पाठ। पूजा के समय उनकी इस आरती को उतारना न भूलें। आरती कीजै हनुमान लला की...।

Author नई दिल्ली | Published on: November 19, 2019 11:31 AM
Hanuman Chalisa, Aarti, Bhajan: मंगलवार के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का करें पाठ।

Hanuman Chalisa, Bhajan, Songs, Aarti: मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इन दिनों में हनुमान जी के मंदिरों में जाकर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं साथ ही इनका प्रिय बूंदी का प्रसाद चढ़ाते हैं। बजरंगबली को संकटमोचक भी कहा जाता है क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। शास्त्रों और पुराणों अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। साथ ही इनकी इस आरती को भी उतारना न भूलें। आरति कीजै हनुमान लला की…

श्री हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti, Aarti Kije Hanuman Lala Ki):

आरति कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपै।
रोग – दोष जाके निकट न झांपै।।

अंजनी पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रेम सदा सहाई।।

दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारि सिया सुधि लाये।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंक जारि असुर संहारे।
सिया रामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि सजीवन प्रान उबारे।।

पैठि पताल तोरि जम – कारे।
अहिरावन की भुजा उखारे।।

बायें भुजा असुर दल मारे।
दहिने भुजा सन्तजन तारे।।

सुर नर मुनि आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।

जो हनुमान जी की आरती गावै।
बसि बैकुंठ परम पद पावै।।

लंक विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई।।

आरति कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) :

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 Kaal Bhairav Jayanti 2019: काशी के कोतवाल कहे जाने वाले काल भैरव के यहां जानिए प्रसिद्ध मंदिर
2 लव राशिफल 19 नवंबर 2019: कन्या राशि वालों को मिल सकता है मनचाहा जीवन साथी, मीन राशि वालों का रिश्ता हो सकता है पक्का
3 Horoscope Today, 19 November 2019: कन्या राशि वालों को धन लाभ होने के हैं आसार, धनु वाले रखें क्रोध पर नियंत्रण
जस्‍ट नाउ
X