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Guruvar Vrat Katha Arti: बृहस्पति देव को खुश करने के लिए करें गुरुवार व्रत, जानें कथा और आरती

Guruvar Vrat Katha Arti in Hindi: गुरुवार व्रत के विषय में मान्यता यह भी है कि जो इसे साल में कम से से कम एक बार कर लेता है उसके जीवन में आर्थिक तंगी नहीं आती है।

Author नई दिल्ली | Updated: October 10, 2019 7:13 AM
धर्म शास्त्रों में गुरुवार व्रत के बारे में वर्णन मिलता है कि इसे साल में 16 बार करना चाहिए।

Guruvar Vrat Katha Arti: गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न कर वैवाहिक जीवन में सुख शांति वरदान पाया जा सकता है। अविवाहित कन्या मनचाहा वर पाने के उद्देश्य से इस व्रत को रखती हैं। इसके अलावा उनकी इच्छा ये भी रहती है कि उन्हें विवाह में हो रही देरी से निजात मिल जाए। गुरुवार व्रत के विषय में मान्यता यह भी है कि जो इसे साल में कम से से कम एक बार कर लेता है उसके जीवन में आर्थिक तंगी नहीं आती है। धर्म शास्त्रों में गुरुवार व्रत के बारे में वर्णन मिलता है कि इसे साल में 16 बार करना चाहिए। क्योंकि 16 गुरुवार का व्रत करने से मनवांछित फल प्राप्ति की कामना की जा सकती है। 16 गुरुवार व्रत करने के बाद इसे 17वें गुरुवार को उद्यापन करना शुभ माना गया है।

गुरुवार व्रत आरती (Guruvar Vrat Katha Arti)

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
ॐ जय बृहस्पति देवा॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बन्धन हारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, सन्तन सुखकारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
जेष्टानन्द बन्द सो सो निश्चय पावे॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा।।

गुरुवार व्रत कथा (Guruvar Vrat Katha)

बहुत समय पहले एक ब्राह्मण रहता था। वह संतान विहीन था जिसे देखकर उसके पत्नी बहुत ही उदास रहती थी। फिर भी वह रोज स्नान के बाद भगवान की पूजा करती। यह देखकर ब्राह्मण बहुत दुखी था। वह भी मन ही मन भगवान की प्रार्थना रोज करता था। परंतु बहुत दिनों तक इसका कुछ हल न निकला। कुछ दिनों बाद भगवान की कृपा से ब्राह्मण की पत्नी को एक बेटी हुई। कन्या बड़ी होने पर रोज सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने लगी। इस तरह वह जब स्कूल जाती तो मुट्ठी में जौ भरकर ले जाते हुए स्कूल का रास्ते हैं डालते जाती और जब जब सोने के हो जाते तो उसे काटकर घर ले आती। एक दिन उस कन्या के पिता उसे घर से जौ ले जाते देख लिया। फिर बोला- बेटी सोने के जौ के लिए सोने का सूप होना चाहिए। अगले ही दिन गुरुवार था, बेटी ने भक्ति भाव से बृहस्पति देव की पूजा की और प्रार्थना की कि उसे सोने के सूप मिल जाए। बृहस्पति देव ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसे सोने का सूप मिल गया। इस तरह गुरुवार की कथा से बृहस्पति देव प्रसन्न होकर उस कन्या हर मनोकामना पूर्ण किए।

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