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Guru Purnima 2019 Puja Vidhi, Vrat Katha: आज है गुरु पूर्णिमा, जानें कैसे करें पूजा, इसका शुभ मुहूर्त और प्रभावशाली मंत्र

Guru Purnima 2019 Puja Vidhi, Vrat Katha, Timings, Procedure: पूर्णिमा तिथि की आरम्भ 16 जुलाई को 1 बजकर 48 मिनट से होगा और इसकी समाप्ति 17 जुलाई को 3 बजकर 7 मिनट पर होगी। गुरु पूर्णिमा पर दोपहर 1:30 से 4:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इसलिए इससे पहले गुरु पूर्णिमा की पूजा कभी भी की जा सकती है।

Author नई दिल्ली | July 16, 2019 10:19 AM
Guru Purnima 2019 Puja Vidhi: इस दिन गुरुओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। लोग अपने गुरुओं की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Guru Purnima 2019 Puja Vidhi, Vrat Katha: आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। जो 2019 में 16 जुलाई को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इस दिन का खास महत्व होता है। यह दिन गुरुओं की सेवा, उनकी पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का होता है। इस दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण गुरुओं की पूजा का समय सीमित हो गया है। क्योंकि 17 जुलाई को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक शाम से ही शुरु हो जायेगा। जिस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। पिछले साल भी गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ा था। यहां जानें गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और प्रभावशाली मंत्रों के बारे में…

पूजा विधि: इस दिन गुरुओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। लोग अपने गुरुओं की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लेकिन अगर आपके गुरु इस दुनिया में नहीं हैं या आपने किसी को अभी अपना आध्यात्मिक गुरु नहीं बनाया है तो ऐसे में आप ऋषि व्यास की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए आपको पूर्णिमा वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने होंगे। पूजा घर में एक चौकी पर सफेद या फिर केसरिया रंग का कपड़ा बिछाएं और आटे से चोक बना लें। इस पर व्यासजी की मूर्ति रखें। मूर्ति न होने पर आप वेद-पुराण या अन्य धार्मिक पुस्तकें रखकर उनकी पूजा करें। इसके बाद किसी योग्य पंडित को दान-दक्षिणा दें। अगर आपके गुरु हैं तो घर की उत्तर दिशा में किसी सफेद वस्त्र पर उनका फोटो रखें। इसके बाद हाथ में जल लेकर अपना नाम, अपने गौत्र का उच्चारण कर गुरु पूजा का संकल्प लें। फिर भगवान का ध्यान करते हुए गुरु के चरण धोएं। इसके बाद अपने गुरु को फूलों की माला चढ़ाएं। गुरु की फोटो या अगर गुरु सामने हों तो उनकी आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लें।

शुभ मुहूर्त: पूर्णिमा तिथि की आरम्भ 16 जुलाई को 1 बजकर 48 मिनट से होगा और इसकी समाप्ति 17 जुलाई को 3 बजकर 7 मिनट पर होगी। गुरु पूर्णिमा पर दोपहर 1:30 से 4:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इसलिए इससे पहले गुरु पूर्णिमा की पूजा कभी भी की जा सकती है। साथ ही इस दिन चंद्र ग्रहण का सूतक 4:30 बजे से शुरु हो जायेगा। जिस कारण पूजा के समय पर प्रभाव पड़ेगा। माना जाता है कि सूतक के दौरन कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं।

गुरु पूर्णिमा के प्रभावी मंत्र:

– गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वराय
गुरुर्साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः
– ओम् गुरुभ्यो नमः
– ओम् गुं गुरुभ्यो नमः
– ओम् परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:
– ओम् वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्.

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