गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा, व्रत और प्रदोष काल में आराधना करने से जीवन के दुख, आर्थिक परेशानियां और ग्रह दोष दूर हो सकते हैं। खासकर जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यहांं हम बात करने जा रहे हैं मई के गुरु प्रदोष व्रत के बारे में, जो 14 मई को आज रखा जाएगा। आइए जानते हैं मई महीना का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा। साथ ही जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…
गुरु प्रदोष व्रत पर करें इस कथा का पाठ, भगवान शिव हो सकते हैं प्रसन्न
गुरु प्रदोष व्रत की तिथि
त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 14 मई 2026 सुबह में 11 बजकर 21 मिनट पर
त्रयोदशी तिथि का अंत: 15 मई को सुबह में 8 बजकर 32 मिनट पर
गुरु प्रदोष व्रत 14 तारीख को ही करना शास्त्र सम्मत है। शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय जब भी त्रयोदशी तिथि रहती है तो उस दिन ही प्रदोष व्रत किया जाता है। इसलिए 14 तारीख को ही गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त- शाम में 5 बजकर 22 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक।
गुरु प्रदोष व्रत पूजा-विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें।
- प्रदोष काल में भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करें।
- शिवलिंग पर धतूरा, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- अंत में शिव आरती और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
इन मंत्रों का करें जाप
भगवान शिव का गायत्री मंत्र – Lord shiva gaytri mantra
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
महामृत्युंजय मंत्र – Mahamrityunjay mantra
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव ध्यान मंत्र – Shiv dhyan mantra
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा । श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं । विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व । जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
रुद्र मंत्र – Lord shiva rudra mantra’s
ॐ नमो भगवते रुद्राये।।
शिव जी का पंचाक्षरी मंत्र – Shiva’s five letter mantra
नम: शिवाय
इन मत्रों को भी जप सकते हैं
ॐ हौं जूं सः ।।
श्री महेश्वराय नम:।।
श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
श्री रुद्राय नम:।।
ॐ नमो नीलकण्ठाय नम:।।
गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: शाम में 5 बजकर 22 मिनट से शाम में 7 बजकर 4 मिनट तक
शिव जी की आरती (Lord Shiva Aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
