Guru Gochar 2026 (गुरु का कर्क राशि में गोचर): वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु को देवताओं का गुरु माना जाता है, जो करीब 1 साल में राशि परिवर्तन करते हैं। लेकिन इस समय गुरु बृहस्पति अतिचारी गति से चल रहे हैं जिसके कारण वह एक साल में 2-3 बार राशि परिवर्तन करेंगे। बता दें कि गुरु बृहस्पति जून माह में कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। गुरु के अपने उच्च राशि में आने से 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिलने वाला है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं गुरु बृहस्पति के कर्क राशि में जाने से मेष से लेकर मीन राशि के जातकों के जीवन में क्या प्रभाव देखने को मिलने वाला है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, देवताओं के गुरु बृहस्पति 2 जून 2026 को 02:25 ए एम को कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे और 31 अक्टूबर 2026 तक इसी राशि में रहेंगे। इसके बाद सिंह राशि में गोचर करेंगे।
मेष राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
मेष राशि के लिए बृहस्पति आपकी गोचर कुंडली के चौथे भाव में रहने वाले हैं। ऐसे में इस राशि के जातकों को कई क्षेत्रों में ला मिल सकता है। नौकरीपेशा जातकों के लिए ये अवधि लाभकारी हो सकती है। प्रमोशन के साथ सम्मान और सफलता हासिल हो सकती है। चौथे घर से बृहस्पति की सातवीं दृष्टि आपके कर्म भाव पर जाती है, जिससे पदोन्नति के साथ कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। रियल एस्टेट या नया वाहन लेने के लिए यह समय अनुकूल है।
वृष राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
इस राशि की गोचर कुंडली में बृहस्पति तीसरे घर से गोचर कर रहे हैं। यह गोचर ट्रैवल, टूरिज्म, ट्रांसपोर्टेशन, रियल एस्टेट और स्वतंत्र व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए विशेष लाभदायक है। पांचवीं दृष्टि सातवें घर पर जाकर नए व्यापार, साझेदारी और जीवनसाथी के मामलों में लाभ प्रदान करेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। अध्यात्म की ओर झुकाव होगा। मित्रों और भाई-बहनों के सहयोग से आय और लाभ में वृद्धि होगी।
मिथुन राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
इस राशि में बृहस्पति उच्च होकर दूसरे घर से गोचर कर रहे हैं। यहां बृहस्पति ज्ञान और वाणी में सुधार करेंगे, जिससे सामाजिक मान्यता और प्रशंसा मिलेगी। परिवार में खुशहाली और वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। शिक्षा और बोलने से जुड़े व्यवसायों में यह समय लाभकारी रहेगा। कार्यस्थल पर प्रमोशन और सफलता मिलेगी। कर्ज से निजात मिलने के साथ-साथ धन लाभ हो सकता है।
कर्क राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
इस राशि के लग्न भाव में गुरु बृहस्पति विराजमान है। उच्च में होने के कारण सामाजिक सम्मान, प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व में वृद्धि होगी। पांचवीं दृष्टि संतान, शिक्षा और मंत्र संबंधी मामलों में लाभ देगी, जबकि सातवीं दृष्टि विवाह में सुरक्षा प्रदान करेगी। छठे घर के स्वामी होने के कारण बृहस्पति रोग और शत्रु निवारण में मदद करेंगे, लेकिन संघर्ष और चुनौती भी आएंगी।
सिंह राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
सिंह राशि के लिए बृहस्पति 12वें घर से उच्च राशि में गोचर कर रहे हैं। खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन शुभ कार्यों में लाभ मिलेगा। नौंवी दृष्टि शनि पर जाने से करियर और कर्म क्षेत्र में सुरक्षा और मार्गदर्शन मिलेगा। आध्यात्मिक साधना और संघर्ष के समय भी बृहस्पति सहारा देंगे।
कन्या राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
कन्या राशि के लिए बृहस्पति 11वें घर से गोचर कर रहे हैं, जो आय और इच्छाओं की पूर्ति का घर है। धन प्राप्ति में वृद्धि होगी। पांचवीं दृष्टि तीसरे घर पर जाएगी, जिससे मित्रों और भाई-बहनों से जुड़े कार्यों में लाभ होगा। सातवीं दृष्टि पांचवें घर पर जाएगी, जिससे संतान और शिक्षा संबंधी लाभ मिलेगा।
तुला राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
तुला राशि के लिए बृहस्पति का गोचर 10वें घर से हो रहा है। तुला राशि के लिए बृहस्पति अकारक ग्रह हैं, लेकिन उच्च स्थान से गोचर शुभ परिणाम देता है। य पांचवीं दृष्टि दूसरे घर पर जाकर वाणी और धन में लाभ देगी, जबकि सातवीं दृष्टि चौथे घर पर जाकर परिवार और उत्सवों में शुभ प्रभाव लाएगी। झूठ और असत्य विचारों से बचना आवश्यक है।
वृश्चिक राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
वृश्चिक राशि के लिए बृहस्पति का गोचर नौवें घर से हो रहा है, जो उनका स्वयं का घर है। इससे काम में तरक्की, उत्साह, भाग्य का साथ, ट्रैवल और नए काम में सुधार मिलेगा। सातवीं दृष्टि तीसरे घर और नवीं दृष्टि पांचवें घर को देखेगी, जिससे संतान और शिक्षा संबंधित लाभ होंगे।
धनु राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
धनु राशि के लिए बृहस्पति आठवें घर से गोचर कर रहे हैं। यह घर समाधि और पूर्व जन्म के कर्मों का प्रतीक है। बृहस्पति उच्च में होने के कारण आध्यात्मिक लाभ देंगे। तपस्या और मंत्र जप से पुराने कर्मों और मन के भय को क्लियर किया जा सकता है। पांचवीं दृष्टि बारहवें घर पर जाकर धर्म संबंधी लाभ देगी। यह गोचर सांसारिक अपेक्षा आध्यात्मिक लाभ देने वाला है।
मकर राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
मकर राशि के लिए बृहस्पति सातवें घर से गोचर कर रहे हैं। उच्च राशि में होने के कारण यह गोचर लाभकारी है। विवाह योग्य मकर राशि वालों के लिए यह समय विवाह के अवसर प्रदान करेगा। पांचवीं दृष्टि 11वें घर पर और नवीं दृष्टि तीसरे घर पर जाएगी, जिससे आय, लाभ और नई योजनाओं में सहायता मिलेगी।
कुंभ राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
कुंभ राशि के लिए बृहस्पति छठे घर से गोचर कर रहे हैं। यह घर संघर्ष, रोग और शत्रुता का प्रतीक है। उच्च में होने के कारण बृहस्पति राहत देंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं, स्वास्थ्य और छिपे शत्रुओं से निपटने में लाभ मिलेगा। खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सफलता का मार्ग मिलेगा।
मीन राशि पर गुरु के कर्क राशि में जाने से असर
मीन राशि के लिए बृहस्पति पांचवें घर से गोचर कर रहे हैं। साढ़ेसाती के दंश से राहत मिलेगी। नौवीं दृष्टि शनि पर होने से शनि के बुरे प्रभाव नियंत्रित होंगे और बुद्धि, स्थिरता तथा मार्गदर्शन मिलेगा।
जरूरी नहीं है कि ये हर व्यक्ति पर 100% एक जैसा लागू हो। हर व्यक्ति की जिंदगी अलग होती है क्योंकि जन्म कुंडली (Birth Chart) में दशा–अंतर्दशा, लग्न, ग्रह स्थिति हर एक चीज अलग-अलग होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी तरह के निर्णय पर पहुंचने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। एक राशि के नाम के करोड़ों जातक होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह के परिणाम में पहुंचने से पहले अपनी कुंडली की जांच किसी शास्त्र के ज्ञाता, ज्योतिषी, पंडित को अवश्य दिखाएं।
