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Gupt Navratri 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Muhurat: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में कैसे करें मां की पूजा, यहां जानिए इसकी पूरी जानकारी

Gupt Navratri 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Shubh Muhurat, Mantra, Samagri: इन नवरात्रों में भक्त कड़े नियमों का पालन करते हुए महाविद्याओं की पूरी विधि के साथ पूजा करते हैं। गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों तक उपवास का संकल्‍प लेकर पहले दिन घटस्‍थापना करनी चाहिए। इन दिनों मां बगलामुखी की सिद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | July 8, 2019 7:42 AM
Gupt Navratri 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Shubh Muhurat, Mantra, Samagri: गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि।

Gupt Navratri 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Shubh Muhurat, Mantra, Samagri: हिन्दू धर्म में दो प्रकार के नवरात्रे आते हैं प्रकट और गुप्त। प्रकट नवरात्रों में नौ देवियों की पूजा की जाती है और गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इस बार गुप्त नवरात्रे 3 से 10 जुलाई तक हैं। यह नवरात्रि हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल के आषाढ़ माह में आती है। जिस कारण इन्हें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। गुप्त नवरात्रों का भी उतना ही महत्व है जितना कि प्रकट नवरात्रों का होता है। यह नवरात्रे आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाए जाते हैं। इन नवरात्रों में भक्त कड़े नियमों का पालन करते हुए महाविद्याओं की पूरी विधि के साथ पूजा करते हैं। गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों तक उपवास का संकल्‍प लेकर पहले दिन घट स्‍थापना करनी चाहिए। इन दिनों मां बगलामुखी की सिद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं।

क्या करना चाहिए गुप्त नवरात्रि में- पूरे नौ दिन सात्विक आहार ही लेना चाहिए।
– पूजा के समय लाल फूल माँ के चरणों में अर्पित करने चाहिए।
– सुबह और शाम माँ को आरती और भोग लगाना आवश्यक होता है।
– गुप्त नवरात्रि में देवी के मंत्रों के अलावा अन्य मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है।

पूजा की विधि- घर के मंदिर में देवी दुर्गा के चित्र को स्थापित करें।
– गुप्त नवरात्रि के दौरान माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा विधि के अनुसार की जानी चाहिए।
– गुप्त नवरात्रि में ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चे मंत्र का जाप करना चाहिए।
– माता को लौंग और बताशे का भोग लगाना चाहिए।
– सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ कीजिए।
–  इन नौ दिनों तक माता के 32 नाम के साथ उनके मंत्रों का भी 108 बार जाप करें।
– दुर्गासप्तशती का एक पाठ प्रातः और एक रात्रि में कीजिए।
– ‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ माता की यह आरती रोजाना पूजा के समय करें।

प्रकट और गुप्त नवरात्रि में अंतर- गुप्त नवरात्रि में केवल तांत्रिक पूजा की जाती है, वहीं प्रकट नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक दोनो प्रकार की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधना को गोपनीय रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में जितनी ज्यादा गोपनीयता रहती है उतना ही ज्यादा साधना का फल मिलता है।

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