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गुलाबनंद ओझा बने बाबा बैद्यनाथ मंदिर के 29वें सरदार पंडा

परंपरा मुताबिक गुलाबनंद ओझा का मुंडन कराया गया। सात नदियों के जल से स्नान कराया गया। तिलक लगाकर उन्हें बाबा मंदिर के गर्भगृह ले जाया गया, जहां पर उन्होंने पूजा-अर्चना की।

गुलाबनंद ओझा के 29वें सरदार पंडा की ताजपोशी रस्म में मौजूद सांसद निशिकांत दुबे, पूर्व महापौर रामनारायण खवाड़े व गणमान्य लोग।

द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ मंदिर के सरदार पंडा के पद पर गुलाबनंद ओझा को बाकायदा विधि-विधान से पदासीन किया गया। ये 29वें सरदार पंडा है। ये अजितानंद ओझा के बड़े बेटे हैं। पंडा समाज के शोभन नरौने ने बताया कि सरदार पंडा का पद वंशानुगत होता है। 28 वें सरदार पंडा अजितानंद ओझा का 22 मई को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वे 85 साल के थे। उनकी तेहरवीं के रोज यह रश्म अदायगी की गई। ज्येष्ठ महीने की पंचमी की सुबह सरदार पंडा की गद्दी पर बैठाने की प्रक्रिया शुरू हुई। परंपरा मुताबिक उनका मुंडन कराया गया। सात नदियों के जल से स्नान कराया गया। तिलक लगा उन्हें बाबा मंदिर के गर्भगृह ले जाकर पूजा अर्चना की। फिर उन्होंने प्रधान पुजारी की हैसियत से मुख्य पूजा की।

इसके बाद राज्य पुरोहित और वैदिकों की मौजूदगी में उन्होंने उपयुक्त विधि से बाबा की पूजा की और रुद्राभिषेक किया।साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना की। इसके बाद गुलाबनंद ओझा को मंदिर परिसर में सरदार पंडा की गद्दी ले जा उन्हें विराजमान किया। उन्हें बाकयदा पगड़ी पहना सरदार पंडा घोषित किया गया। इस दौरान झारखंड गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे, पूर्व महापौर रामनारायण खवाड़े उर्फ बबलू खवाड़े, पंडा धर्म रक्षिणी सभा के पदाधिकारी व सदस्य समेत शहर के गणमान्य लोग मौजूद थे।

यहां उल्लेखनीय है कि अजितानंद ओझा की 46 साल बाद बीते साल 6 जुलाई को सरदार पंडा के पद पर ताजपोशी हुई थी। वह भी न्यायालय के आदेश से। 1970 से सरदार पंडा ओहदे पर बैठने की लड़ाई अदालत में लंबित थी। सरदार पंडा भवप्रीतानंद ओझा के निधन के बाद से यह पद 46 सालों से खाली था। इतने साल की अदालती लड़ाई के बाद वे पद सुख एक साल भी नहीं भोग सके।

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