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Good Friday 2018: जानिए क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे और कौन थे ईसा मसीह

Good Friday 2018: गुड फ्राइडे की तैयारी में पूरे दुनिया में ईसाई धर्म के अनुयायी 40 दिन शोक मनाते हैं। इसमें यीशु के करोड़ों अनुयायी निराहार उपवास रखते हैं। लोग प्रार्थना, संगीत और प्रवचन के जरिए ईसा मसीह को याद करते हैं और अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं।

Good Friday 2018: वह खुद को ईश्वर का पुत्र मानते थे।

Good Friday 2018: ईसाई धर्म के अनुयायी 30 मार्च को गुड फ्राइडे मनाएंगे। इसे ईसाई धर्म के प्रवर्तक यीशु मसीह के शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, ईसा मसीह ने अपने भक्तों के लिए बिना किसी स्वार्थ अपना बलिदान दे दिया था। ईसाइयों के धर्मग्रंथ बाइबिल के मुताबिक, शुक्रवार के ही दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। ईसा मसीह ने पूरे जीवन अपने भक्तों को भाईचारा, एकता, मानवता और शांति का उपदेश दिया। ईसा लोगों में ईश्वर के प्रति आस्था जगाने में लगे थे। वह खुद को ईश्वर का पुत्र मानते थे।

ईसा मसीह की बढ़ती लोकप्रियता धर्मगुरुओं को पसंद नहीं आ रही थी। इसके बाद धर्मगुरुओं ने रोम के शासक के कान भरने शुरू कर दिए। धर्मगुरुओं ने ईसा को ईश्वर पुत्र बताने को भारी पाप करार दिया। शासक ने ईसा को क्रूस पर लटकाने का आदेश दे दिया। माना जाता है क्रूस पर लटकाने से पहले ईसा को अनेक यातनाएं दी गईं। उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। उन्हें शराब पिलाई गई। इन सब यातनाओं के बाद ईसा को सूली पर कीलों से ठोक दिया गया। बाइबिल ग्रंथ के मुताबिक, ईसा ने अपने प्राण त्यागते हुए कहा, ‘हे पिता, मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं।’ ये कहने के साथ ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। बाइबल के मुताबिक, सूली पर लटकाने के बाद हर ओर अंधेरा छा गया था।

गुड फ्राइडे की तैयारी में पूरे दुनिया में ईसाई धर्म के अनुयायी 40 दिन शोक मनाते हैं। इसमें यीशु के करोड़ों अनुयायी निराहार उपवास रखते हैं। लोग प्रार्थना, संगीत और प्रवचन के जरिए ईसा मसीह को याद करते हैं और अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। यह प्रार्थना और उपवास 40 दिन तक की जाती है, जिसका समापन गुड फ्राइडे से दो दिन बाद रविवार को ईस्टर संडे के तौर पर होता है। धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार, रविवार को यीशू दोबारा से जी उठे थे, इसी की खुशी में ईस्टर या ईस्टर रविवार मनाया जाता है। गुड फ्रायडे से एक दिन पहले यानी गुरुवार को पवित्र भोज किया जाता है। माना जाता है कि प्रभु यीशु ने अपनी मृत्यु से एक दिन पहले अपने अनुयायियों के साथ भोज किया था। इस दिन को प्रभु भोज के नाम से भी जाना जाता है।

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