इन मालाओं से करना चाहिए देवी- देवताओं का जाप, बन सकते हैं बिगड़े काम

God Worship: पुराणों में हर देवी देवता के लिए अलग-अलग प्रकार की मालाओं के बारे में बताया गया है। तो आज आपको बताएंगे कि किन मालाओं से किनका जप करना चाहिए।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः unsplash)

Puja-Path Niyam: पुराणों में अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए सबसे आसान और श्रेष्ठ मार्ग माला जप करना बताया है। लेकिन मालाएं 1 या 2 प्रकार की नहीं होती हैं बल्कि कई प्रकार की होती हैं, जिनके माध्‍यम से ईश्वर का आह्वान किया किया जाता है। पुराणों में हर देवी देवता के लिए अलग-अलग प्रकार की मालाओं के बारे में बताया गया है। तो आज आपको बताएंगे कि किन मालाओं से किनका जप करना चाहिए।

गणेश: भगवान श्री गणेश और देवगुरु बृहस्पति हल्दी की माला से जप करने पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। संतान एवं ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस माला से विशेष रूप से जप किया जाता है। काली का आह्वान करने के लिए काली हल्दी या नील कमल की माला का प्रयोग करना है। हल्दी की माला से मां बगलामुखी का जप करने से उनकी शीघ्र कृपा होती है।

शिव: रुद्राक्ष जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। इससे शिव का जाप कर आसानी से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। अगर भगवान को प्रसन्न करना चाहते है तो रुद्राक्ष की माला से शिव के मंत्रों का जाप करे।

मां अम्बा: मां अम्बा की उपासना करने के लिए स्फटिक की माला से जप करना शुभ माना जाता है। इस माला के प्रभाव से किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति पास नहीं आती और हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

मां दुर्गा: दुर्गा मां की उपासना लाल रंग के चंदन की माला, जिसे रक्त चंदन माला कहा जाता है; से करना चाहिए। प्रसाद के रूप में माथे पर लगाया जाने वाला चंदन मन और तन दोनों को शीतलता प्रदान कर दैवीय कृपा दिलाता है। शक्ति की साधना में की माला से और भगवान कृष्ण के मंत्र का जप सफेद चंदन की माला से किया जाता है। इस माला के मंत्र जप से मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होती है।

सूर्यदेव: माणिक्य या बेल की लकड़ी की माला से के भगवान सूर्यदेव के मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे सभी प्रकार के पितृदोष और ग्रह पीड़ा दूर हो जाती है।

लक्ष्मी: लक्ष्मीमंत्र का जाप हमेशा कमलगट्टे की माला से करना चाहिए। इस माला से महालक्ष्मी के मन्त्रों का जप किया जाए तो धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। वहीं तुलसी और चंदन की माला से विष्णु भगवान के मंत्र का जाप करना चाहिए।

सरस्वती: मां सरस्वती की साधना- आराधना में स्फटिक माला का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। स्फटिक की माला धन और मन दोनों तरह की ताकत प्रदान करती है। इस माला को धारण करने वाले व्यक्ति का मन शांत रहता है। इस माला के प्रभाव से उसके पास किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति नहीं फटक पाती।

चंद्र: चंद्रमा की शांति के लिए आप जिस मंत्र का जाप कर रहे है उस मंत्र का जाप मोती की माला से करना चाहिए। इस माला से चंद्रदेव और शिवजी की आराधना की जाती है। मोती, शंख या सीप की माला धारण करने वाले को संसार के समस्त प्रकार के लाभ मिलते हैं।

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