बागों वाले बागेश्वर देवता के रूप में पूजे जाते हैं नाग देवता

हरिद्वार में यहां के तीर्थ पुरोहित नाग देवता की पूजा बागों वाले बागेश्वर देवता के रूप में करते हैं।

बागों वाले बागेश्वर देवता का प्रसिद्ध मंदिर।


हरिद्वार में यहां के तीर्थ पुरोहित नाग देवता की पूजा बागों वाले बागेश्वर देवता के रूप में करते हैं। हरिद्वार के बीएचएल औद्योगिक क्षेत्र में नाग देवता का विशाल बगीचे में बागों वाले बागेश्वर देवता के नाम से प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है। अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए तीर्थ पुरोहितों के अलावा अन्य लोग भी दूर-दूर से आकर नाग देवता की पूजा करते हैं। यहां पर तीर्थ पुरोहितों ने 300 साल पहले नाग देवता के मंदिर की स्थापना की थी। तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि 300 साल पहले उनके किसी पूर्वज को नाग देवता ने इस स्थान पर साक्षात रूप में पुरुष वेश में दर्शन दिए थे और यहीं पर नाग देवता का मंदिर स्थापित करने को कहा था। तीर्थ पुरोहितों ने अपने-अपने पितरों के स्थान पितृ देवता के रूप में स्थापित किए, जिनकी तादाद 80 से 100 के बीच में है।

यहां पर सूर्य भगवान का मंदिर है। इसके अलावा हनुमान एवं दुर्गा देवी का मंदिर स्थापित है। सूर्य भगवान के मंदिर में रविवार को विशेष पूजा-अर्चना होती है। बागों वाले बागेश्वर देवता के मंदिर में नाग पंचमी के दिन विशाल मेला लगता है। यहां पर वसंत पंचमी ,ऋषि पंचमी और हर महीने में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की पंचमी को नाग देवता की पूजा अर्चना होती है। नाग देवता की पूजा के लिए पंचमी का दिन विशेष माना जाता है। नाग पंचमी का दिन तो नाग देवता की पूजा के लिए विशेष महत्व वाला है। इसके अलावा अमावस्या और शनि अमावस्या के दिन भी नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है। लोग नाग पंचमी, ऋषि पंचमी, वसंत पंचमी और हर महीना शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन कालसर्प योग के उपाय के लिए यहां पर आकर पूजा अर्चना करते हैं।

नाग देवता का अभिषेक विधि विधान से किया जाता है। बागो वाले बागेश्वर देवता के मंदिर के पुजारी पंडित सचिन शर्मा भोले का कहना है कि उनके पूर्वजों को करीब 350 पहले सपने में नाग देवता ने दर्शन दिए थे और इसी स्थान पर अपना मंदिर विधिपूर्वक वैदिक विधि विधान से स्थापित करने की बात कही थी। तब उनके पूर्वजों ने यहां पर मंदिर की स्थापना की थी। बागेश्वर देवता के चेहरे पर नाग देवता की छवि दिखाई देती है। बागों वाले बागेश्वर देवता को चौपड़ खेलने का बहुत शौक है और मंदिर परिसर में संगमरमर की चौपड़ की स्थापना की गई है। यहां पर बागेश्वर नाग देवता चौपड़ खेलने के लिए आते हैं। आज तक उन्होंने कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है और ना ही किसी को डसा है। वे भक्तों के कल्याण के लिए उन्हें भरपूर आशीर्वाद प्रदान करते हैं जो व्यक्ति यहां पर सच्चे भाव से अपनी मनोकामना लेकर आता है बागेश्वर नाग देवता उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं और उन्हें दर्शन देते हैं।

नाग देवता के मंदिर में परिक्रमा पूरी नहीं की जाती है। भगवान शिव के मंदिर की तरह जिस तरह शिवलिंग की पूजा के बाद उनकी परिक्रमा अधूरी की जाती है वैसे ही बागेश्वर नाग देवता को शंकर जी का अनुयाई माना जाता है इसलिए उनकी परिक्रमा भी शंकर जी के शिवलिंग के मंदिर की परिक्रमा की तरह आधी की जाती है।

बागों वाले बागेश्वर नाग देवता इच्छाधारी नाग देवता है इसलिए वे कभी पुरुष के रूप में और कभी नाग देवता के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यहां पर लोग दूर-दूर से पंचमी के दिन बागेश्वर नाग देवता की पूजा करने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर से आए राकेश विज का कहना है कि उनके कुल देवता नाग देवता हैं और वे नाग देवता की पूजा करने के लिए यहां पर आते हैं। वे भंडारे का आयोजन अपने माता-पिता की याद में करते हैं। कुंभ मेले में भी उन्होंने यहां पर भंडारा रखा था। इस पवित्र पावन स्थान पर बागेश्वर नाग देवता के दर्शन करने से मन को आत्मिक शांति मिलती है।

बागों वाले बागेश्वर नाग देवता के मंदिर की स्थापना को लेकर बहुत ही दिलचस्प बातें जुड़ी हुई हैं। 1962 में जब बीएचईएल की स्थापना की गई थी तब यहां बागेश्वर नाग देवता के मंदिर की भूमि को अधिग्रहित करने के लिए और यहां पर बुलडोजर चलाने के लिए बीएचईएल के अधिकारी आए तो उनकी मशीनें खराब हो गईं और उन्हें नाग देवता ने अपनी उपस्थिति का आभास कराया। बागेश्वर नाग देवता की इस शक्ति को देखते हुए तब के बीएचईएल के अधिकारियों ने नाग देवता के इस परिसर की जमीन को उनके स्थान के लिए छोड़ दिया और बागों वाले बागेश्वर देवता की यह भूमि बीएचईएल के अंतर्गत आती है। बागों वाले बागेश्वर नाग देवता का यह पवित्र पावन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है जो भक्त श्रद्धा भाव से यहां पर पूजा करने आते हैं उन्हें बागेश्वर देवता दर्शन देकर उनका कल्याण करते हैं

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