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यहां पेड़ से प्रकट हुए थे हनुमान, जानिए क्या है बंधवा हनुमान मंदिर की महिमा

मान्यता है कि शनिवार के दिन जो भी भक्त बंधवा हनुमान की शरण में आकर लड्डू, तुलसी और फूल हनुमान जी को अर्पित करते हैं उन पर से साढ़ेसाती का प्रभाव कम होने लगता है। साथ ही शनि के प्रकोप से मुक्ति मिलती है।

Author नई दिल्ली | April 19, 2019 3:15 PM
बंधवा हनुमान जी।

कलियुग में हनुमान जी की उपासना कल्याणकारी मानी गई है। ऐसे में यदि हनुमान जयंती का शुभ संयोग बने तो इस अवसर पर हनुमान जी की आराधना सभी कामों में सिद्धि प्रदान करता है। राम भक्त हनुमान की पूरी दुनिया में कई मंदिर हैं। जहां इनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। लोग इन स्थानों पर श्रद्धा-भक्ति के साथ जाते हैं और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं। इन्हीं में से एक है मिर्जापुर के विंध्याचल पर्वत पर स्थित बंधवा हनुमान मदिर। यहां भक्त हनुमान जी को बंधवा हनुमान जी के नाम से पुकारते हैं।

कहते हैं कि हनुमान जी की यह प्रतिमा यहां कब से है कोई नहीं जानता, लेकिन श्रद्धालुओं का मानना है कि बाल रूप में हनुमान जी सबसे पहले यहां एक वृक्ष से प्रकट हुए थे। धार्मिक मान्यतों के अनुसार विंध्याचल में त्रिकोण यात्रा का विशेष महत्व है। इसी त्रिकोण यात्रा के दौरान बाबा बंधवा हनुमान जी के दर्शन किए जाते हैं। माना जाता है कि हनुमान जी के दर्शन के बिना विंध्याचल धाम की यात्रा पूरी नहीं होती है।

विंध्याचल पर्वत के पास ही स्थित है बंधवा हनुमान जी का यह मंदिर। यहां स्थित हनुमान जी प्रतिमा को बहुत पुराना बताया जाता है। यह प्रतिमा कितनी पुरानी है यह जानकारी कहीं नहीं मिलती है।  श्रद्धालुओं के अनुसार यहां सबसे पहले हनुमान जी एक पेड़ से प्रकट हुए थे। फिर धीरे-धीरे हनुमान जी की प्रतिमा का आकार बढ़ने लगा। साथ ही स्थानीय लोग ये मानते हैं कि इस प्रतिमा का आकार अभी भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस हनुमान मंदिर में विशेष रूप से अधिकतर भक्त शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए आते हैं।

मान्यता है कि शनिवार के दिन जो भी भक्त बंधवा हनुमान की शरण में आकर लड्डू, तुलसी और फूल हनुमान जी को अर्पित करते हैं उन पर से साढ़ेसाती का प्रभाव कम होने लगता है। साथ ही शनि के प्रकोप से मुक्ति मिलती है। इस मंदिर में बंधवा हनुमान जी बाल रूप में विराजमान हैं और इनका स्वरूप भी बच्चों जैसा ही है। यहां स्थित हनुमान जी का बाल रूप सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला और अत्यंत ही प्रिय है।

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