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ज्योतिष शास्त्र: शनि का रत्न होता है नीलम, जानिए क्या बताए गए हैं इसे धारण करने के लाभ

ज्योतिष के जानकार ऐसा मानते हैं कि सभी नौ ग्रहों में से सबड़े अधिक दिनों तक शनि का ही प्रकोप रहता है। शनि के प्रकोप से बचने के लिए ज्योतिष में नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।

Astrology, gemstone of Saturn, Neelam Gems, sapphire, benefits of Neelam Gems, benefits of sapphire, sapphire stone benefits, shani, shanidev, shnidev ratna, religion newsशनि का रत्न नीलम।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्नों का प्रभाव धारण करने वाले हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। हर ग्रह के लिए कुछ खास रत्न बताए गए हैं, जो संबंधित ग्रह की दशा को ठीक रखने में सहायक होता है। रत्नों के प्रभाव के कारण कुंडली के अशुभ ग्रह भी शुभ परिणाम देने लगते हैं। इसलिए रत्नों का महत्व और भी बढ़ जाता है। वहीं ज्योतिष के जानकार ऐसा मानते हैं कि सभी नौ ग्रहों में से सबसे अधिक दिनों तक शनि का ही प्रकोप रहता है। शनि के प्रकोप से बचने के लिए ज्योतिष में नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। आगे यह जानते हैं कि शनि के रत्न नीलम को धारण करने के क्या लाभ बताए गए हैं।

इस रत्न को शनिवार के दिन मध्यमा (बीच वाली) उंगली में धारण किया जाता है। साथ ही इसे विशेष विधि के साथ पहना जाता है। जब भी नीलम धारण करें उससे पहले हल्का सा उस पर सरसों का तेल लगाएं। उसके बाद शनिदेव का शनि स्तोत्र पढ़ें फिर उसे जल से शुद्ध करें। शनि स्त्रोत पढ़ने के बाद नीले रंग के कपड़े में नीलम को अच्छे से लपेट लें। फिर नीलम रत्न के निचले भाग में जहां नुकीला बना होता है, वहां पर हल्का सा कपड़ा काट लें और शनिवार के दिन इसे दाहिनी बाजू पर पूरे एक सप्ताह के लिए बांध लें। वहीं अगर ऐसा लगे कि इसे बांधने के कुछ समय के बाद कुछ अच्छा नहीं हो रहा है या कुछ अजीब सा लग रहा है तो ऐसे इसे धरण नहीं करें।

साथ ही यदि लगता है एक सप्ताह चैन से गुजरा, अच्छे से बीता, सबकुछ अच्छा रहा और यदि कोई सकारात्मक संकेत मिले तो नीलम धरण कर सकते हैं। कहते हैं कि नीलम धारण करने वाले की संपत्ति यदि खो जाए तो वह वापस मिल जाती है। यह रत्न दुश्मन के चालों से भी व्यक्ति को सावधान करता है और अपने रंग को फीका कर के स्पष्ट चेतावनी देता है। जिससे हम बच सकते हैं। वहीं जादू-टोने के प्रभाव को भी यह रत्न नष्ट कर देता है। इसके अलावा रोगों से भी यह रत्न बचाव करता है। जैसे कि मानसिक परेशानी, मूर्छा, मिर्गी, वमन, और बावासीर आदि में भी लाभ पहुंचाता है।

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