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कितने साल तक पहन सकते हैं कौनसा रत्न, जाने क्या है रत्न पहनने का महत्व

रत्नों के बारें में ज्योतिषियों का कहना है कि रत्नों को विशेषज्ञों की सलाह पर ही पहनना चाहिए।

ज्योतिषियों के अनुसार पन्ना रत्न को अंगूठी में जड़वाने के दिन से तीन साल तक प्रभावशाली रहता है। (Source: By Invite Only)

रत्न कई तरह के होते हैं। हर रत्न का अपना अलग-अलग महत्व होता है। रत्नों के बारें में ज्योतिषियों का कहना है कि रत्नों को विशेषज्ञों की सलाह पर ही पहनना चाहिए। बिना विशेषज्ञों की सलाह पर रत्न पहनना घातक सिद्ध हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि रत्नों को राशि के अनुसार ही पहनना चाहिए। हर रत्न की एक समय सीमा होती है। समय सीमा खत्न होने के बाद रत्न का महत्न खत्म हो जाता है और बिना महत्न का रत्न पहनने का कोई फायदा नहीं होता। आज हम आपके लिए लाएं हैं पं. शाशि मोहन बहल द्वारा लिखी गई किताब ‘रत्न रंग और रुद्राक्ष’ में लिखी गई प्रमुख बातें, जिसमें रत्नों के पहने की सीमा बताई गई है।

1. माणिक- माणिक रत्न के बारे में कहा गया है कि यह रत्न अंगूठी में जड़वाने से लेकर चार साल तक प्रभावशाली रहता है।
2. पन्ना- पन्ना रत्न के बारे में ज्योतिषियों का मानना है कि अंगूठी में जड़वाने के दिन से तीन साल तक प्रभावशाली रहता है। इसके बाद इसका महत्व खत्म हो जाता है।
3. हीरा- हीरा बहुत महंगा आता है। अंगूठी में जड़वाने के सात साल तक प्रभावशाली रहता है।
4. नीलम- अंगूठी में पहनने के पांच साल तक प्रभावशाली रहता है।
5. पुखराज- इसकी समयसीमा चार साल की होती है। चार साल के बाद इसका प्रभाव खत्म हो जाता है।
6. गोमेद- पहनने के तीन साल कर प्रभावशाली रहता है।
7. लहसुनिया- पहनने के दिन से तीन साल कर प्रभावशाली रहता है।

रत्न पहनते समय राशि का खास ध्यान रखना चाहिए। राशि के अनुसार रत्न पहनना ही अच्छा माना जाता है। इन सबके अलावा लहसुनियां-हीरा, मूंगा-नीलम, नीलम-माणिक इन सभी को कभी एक साथ नहीं पहनना चाहिए। आप इन रत्नों को एक साथ तभी पहन सकते हैं तब ग्रहों की अवस्था हो या दशा-अन्तर्दशा चल रही हो। ये रत्न तभी आपके लिए फायदायी होते हैं।

ज्योतिषी मानते हैं कि जिस व्यक्ति को गुस्सा आता है उसे पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि गुस्से में व्यक्ति धमकी आदी देता है। जो कई बार लड़ाई का कारण भी बनती है। वहीं गुरु का प्रभाव बढ़ाने और उसके अशुभ प्रभाव को खत्म करने के लिए पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है।

माणिक को अनामिका में पहना जाता है। इसे सूर्य का रत्न कहा जाता है। माणिका को उच्च पदाधिकारी, न्यायाधीश, कलेक्टर आदि की उँगली में देखा जा सकता है।

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