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Gemology: ऐसे धारण करना चाहिए नीलम रत्न, शनि की महादशा और साढ़े साती से मिल सकती है मुक्ति

Gemology: ज्योतिष अनुसार इस चमत्कारिक रत्न को धारण करने से आर्थिक लाभ मिलता है। इसी के साथ ये रत्न शनि दोषों से भी मुक्ति दिलाता है।

Gemology: ऐसे धारण करना चाहिए नीलम रत्न, शनि की महादशा और साढ़े साती से मिल सकती है मुक्ति
ज्योतिष अनुसार ये रत्न प्रसिद्धि दिलाता है और भाग्य में वृद्धि करता है।- (जनसत्ता)

शनिदेव को कर्म फलदाता कहा जाता है, क्योंकि यह सभी मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। हिन्दू धर्म में शनि ग्रह शनि देव के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक शास्त्रों में शनि को सूर्य देव का पुत्र माना गया है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि सूर्य ने श्याम वर्ण के कारण शनि को अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया था। तभी से शनि सूर्य से शत्रु का भाव रखते हैं। शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कुछ राशियों पर शनि साढ़ेसाती तो कुछ पर शनि ढैय्या शुरू हो जाती है। शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान लोगों को कई प्रकार की आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक नीलम(Blue Sapphire) शनि ग्रह का रत्न होता है, जिसे नीला पुखराज भी कहते हैं। जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में शुभ भावों का अधिपति शनि हो अथवा शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि से संबंधित अन्य परेशानी है तो ऐसे लोगों को अवश्य ही नीलम रत्न पहनना चाहिए। नीलम रत्न साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से आपकी रक्षा करती है।

इसके अलावा ऐसा माना जाता है कि नीलम मनुष्य में ज्ञान तथा धैर्य की वृद्धि करता है और तनाव तथा चिंताओं से दूर रख मन को शांति प्रदान करता है। नियमों के अनुसार नीलम रत्न को धारण करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे धन लाभ और सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

इस तरह करें रत्न धारण: नीलम को शनिवार के दिन गाय के दूध, शहद व गंगाजल के मिश्रण में 15-20 मिनट तक डाल कर रखें। इसके बाद पांच अगरबत्ती जलाएं और ॐ शम शनिचराय नमः मंत्र का 11 बार जाप करें। इसके बाद दाएं हाथ की बीच की उंगली में इसे धारण कर लें। नीलम रत्न की कीमत थोड़ी अधिक होती है, इसीलिए व्यक्ति को सही जगह से ही इसे खरीदना चाहिए।

नीलम के शुभ प्रभाव को पाने के लिए कम से कम 2 कैरेट का रत्न तो धारण करना ही चाहिए। साढ़ेसाती या फिर ढैय्या से पीड़ित लोगों को कम से कम 5 या 7 रत्ती का नीलम रत्न, शनिवार के दिन पंचधातु या फिर स्टील की अंगूठी में जड़वाकर धारण करना चाहिए। बता दें कि नीलम रत्न के साथ कोई दूसरा रत्न जैसे माणिक्य, मोती, मूंगा आदि नहीं पहनना चाहिए।

नीलम का प्रभाव: नीलम रत्न को धारण करने के बाद इसका प्रभाव 24 घंटे के भीतर ही दिखने लगता है, यदि यह रत्न आपके अनुकूल नहीं है तो आंखों में जलन या आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ता है। इसके अलावा नीलम धारण करने का मतलब यह ही नहीं कि आपका शुभ ही शुभ हो, नीलम का प्रभाव कभी-कभी नकारात्मकता की ओर भी चला जाता है। इसके प्रभाव से कई बार बहुत बड़े-बड़े बदलाव आते हैं जो विनाश की ओर भी ले जाते हैं।

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First published on: 25-02-2022 at 09:32:00 am
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