आज दिव्य धाम की सीरीज में बात करने जा रहे हैं गंगोत्री धाम के बारे में, यह धाम गंगोत्री मंदिर, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के तट पर स्थित एक पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल है। यह गंगा नदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर पवित्र चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और यहां भागीरथ ने देवी गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या की थी। वहीं यहां पहुंचने वाले तीर्थयात्री विभिन्न प्रकार के धार्मिक कर्म कांड इस स्थल पर संपूर्ण करते हैं। गंगोत्री धाम के कपाट हर वर्ष अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं और भाई दूज पर बंद होते हैं। वहीं इस साल गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खोले जाएंगे।
मां गंगा स्वर्ग से धरती पर हुई थीं अवतरित
उत्तराखंड के चार धाम में शामिल गंगोत्री धाम मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। यहां स्थित गंगोत्री मंदिर में देवी गंगा की पूजा होती है और यह स्थान मोक्षदायिनी तीर्थ माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आकर गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।
गंगोत्री मंदिर को 18वीं शताब्दी में गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा द्वारा बनवाया गया था। बाद में जयपुर राजघराने ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। सफेद ग्रेनाइट से बना यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
इस समय करें गंगोत्री धाम की यात्रा
गंगोत्री धाम की यात्रा के लिए मई-जून और सितंबर-अक्टूबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है, जब मौसम साफ और सुहावना रहता है। वहीं यात्रा पर जाने से पहले मौसम की जानकारी लेना, गर्म कपड़े साथ रखना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां ठंड अधिक पड़ती है।
कैसे पहुंचे गंगोत्री धाम
गंगोत्री धाम पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जबकि सबसे पास रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा ऋषिकेश, उत्तरकाशी और हर्षिल होते हुए गंगोत्री तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह धाम गोमुख ग्लेशियर के पास स्थित है, जो गंगा नदी का वास्तविक उद्गम स्थल माना जाता है।
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