Gangaur Vrat 2026: गणगौर व्रत सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इसे तृतीया तीज के रूप में भी जाना जाता है। आपको बता दें कि इस दिन देवी गौरी और भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की जाती है। यह व्रत खासतौर पर शादीशुदा महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। जहां वे भगवान शिव (ईसर) और माता पार्वती (गौर) की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहे वर की कामना करती हैं।, जबकि कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने की कामना से इसे करती हैं। इस साल गणगौर पर रवि योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया। आइए जानते हैं इस साल गणगौर का व्रत कब रखा जाएगा…
गणगौर पूजा तिथि (Kab Hai Gangaur Puja 2026)
फ्चूचर पंचांग के मुताबिक इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02 बजकर 31 मिनट पर आरंभ होगी। वहीं इसका अंत इसी दिन रात में 11 बजकर 57 मिनट पर हो जाएगा। पंचांग को देखते हुए 21 मार्च दिन शनिवार को गणगौर व्रत किया जाएगा।
गणगौर पूजा शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस दिन रवि योग बन रहा है। इस योग में पूजा करने का दोगुना फल मिलता है।
गणगौर पूजा-विधि
गणगौर के दिन महिलाएं विशेष विधि से माता गौर और भगवान शिव की पूजा करती हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मिट्टी या लकड़ी की ईसर-गौर की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें सुहाग सामग्री जैसे चुनरी, सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी आदि अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, फूल और जल से विधिवत पूजा करें। गणगौर के गीत गाए जाते हैं और अंत में प्रसाद चढ़ाकर परिवार में बांटा जाता है। कई स्थानों पर शोभायात्रा भी निकाली जाती है।
गणगौर का महत्व
गणगौर पर्व का विशेष महत्व वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। राजस्थान में यह त्योहार बड़े उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर गीत-नृत्य करती हैं।
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