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Ganesh Stotra: गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए करें गणपति स्तोत्र का पाठ

Ganesh Stuti Mantra: विघ्नों को हरने वाले एवं बुद्धि और यश के देवता भगवान गणेश की अराधना करने के वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन उन्हें उनके स्त्रोत को पढ़कर प्रसन्न किया जा सकता है। इसके अलावा गणेश जी को इन स्तुति मंत्रों का जाप करके भी प्रसन्न किया जा सकता है।

इन स्तुति मंत्रों और इस स्तोत्र के पाठ से भगवान गणेश को करें प्रसन्न।

गणेश स्तुति और स्तोत्र: भगवान श्री गणेश जिनकी सभी देवी देवताओं में सबसे पहले अराधना की जाती है। इन्हें गजानन, विघ्नहर्ता, गणपति, लंबोदर कई नामों से जाना जाता है। विघ्नों को हरने वाले एवं बुद्धि और यश के देवता भगवान गणेश की अराधना करने के वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन उन्हें उनके स्त्रोत को पढ़कर प्रसन्न किया जा सकता है। नारद पुराण में संकटनाशन गणेश स्तोत्र लिखा गया है, कहा जाता है इस स्त्रोत का पाठ करने से आप अपने जीवन की हर परेशानी दूर कर सकते हैं। इसके अलावा गणेश जी को इन स्तुति मंत्रों का जाप करके भी प्रसन्न किया जा सकता है।

जय गणेश जय गणेश देवा आरती…

संकटनाशन गणेश स्तोत्र (Ganesh Stotra) :

प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥

प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥

लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥

नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥

जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥

॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

भगवान श्री गणेश स्तुति मंत्र (Ganesh Stuti Mantra) :  

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय!
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते!!
भक्तार्तिनाशनपराय गनेशाश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय!
विद्याधराय विकटाय च वामनाय , भक्त प्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते!!
नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नम:!
नमस्ते रुद्राय्रुपाय करिरुपाय ते नम:!!
विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारणे!
भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक!!
लम्बोदर नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय!
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!
त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति ,
भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति!
विद्याप्रत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति,
तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव!!
गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम !
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोSस्तु सदा मम !!

अगर समय के अभाव के कारण इस स्तुति मंत्र का पाठ करना संभव न हो तो इस छोटे से मंत्र द्वारा उनकी आराधना की जा सकती है:

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् ।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणाम् ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिःसीदसादनम्
ॐ महागणाधिपतये नमः ॥

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