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गणेश जयंती 2018 व्रत कथा: माता पार्वती ने भी किया था संतान को पाने के लिए श्रीगणेश का व्रत, जानें क्या है कथा

Ganesh Jayanti 2018 Vrat Katha, Puja Vidhi: शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का पूजन करना लाभकारी माना जाता है, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिला के लिए ये व्रत मंगलकारी होता है।

Ganesh Jayanti 2018: भगवान गणेश को संकटमोचन और विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य को शुरु करने से पहले भगवान गणेश का पूजन करने से रास्ते के सभी विघ्न खत्म हो जाते हैं। इसी कारण से इन्हें संकटमोचन और विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। विनायक चतुर्थी के दिन जो भक्त भगवान गणेश का व्रत करता है और उनकी कथा का पाठ करता है उसके जीवन की परेशानियों का अंत होने लगता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे पर बैठे थे वहां पर माता ने भगवान शिव से समय व्यतीत करने के लिए चौपड़ खेलने के लिए कहा।

भगवान शिव चौपड़ खेलने के लिए तैयार हो गए, लेकिन हार जीत का फैसला कौन करेगा इसका सवाल उठा। तब भगवान शिव ने कुछ तिनके इकठ्ठे किए और उनका एक पुतला बनाकर उसमें प्राण-प्रतिष्ठा कर दी और पुतले से कहा कि हम चौपड़ खेलना चाहते हैं और हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है इसलिए तुम ये काम करो। संयोग से ये खेल माता पार्वती ने जीता। खेल समाप्त होने के बाद खेल के विजेता को घोषित करने के लिए उस बालक से पूछा तो उसने भूलवश भगवान शिव को विजयी बता दिया।

माता पार्वती इसपर क्रोधित हो गईं और उन्होनें बालक को श्राप दे दिया। बालक ने उनसे माफी मांगी और कहा कि मुझसे गलती हुई है। इस पर माता ने उसे कहा कि इस स्थान पर गणेश पूजन के लिए नागकन्याएं आएंगी और उनसे गणेश पूजन की विधि पूछना और व्रत करना। इससे तुम्हारे सारे कष्ट खत्म हो जाएंगे। कुछ समय बाद उस स्थान पर नागकन्याएं आईं और बालक ने गणेश व्रत की विधि पूछकर उसका पालन किया। बालक की श्रद्धा से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसे वरदान मांगने के लिए कहा। बालक ने उनसे कहा कि मेरे पैरों को ठीक कर दें जिससे मैं अपने माता-पिता से मिलने जा पाऊं।

श्रीगणेश से वरदान पाकर बालक ठीक हो गया और माता-पिता से मिलने कैलास पहुंचा। वहां पर उसने भगवान शिव को पूरी कथा सुनाई। चौपड़ के खेल के दिन से माता पार्वती शिवजी से नाराज हो गईं थी। ये कथा जब भगवान शिव ने माता पार्वती को बताई तो उन्हें भी अपने पुत्र से मिलने की इच्छा हुई। भगवान शिव ने ये भी बताया कि बालक ने 21 दिनों तक गणेश का व्रत किया। इस बात से प्रभावित होने के बाद माता पार्वती वापस कैलास आ गईं, वहां भगवान शिव ने उन्हें गणेश के व्रत की विधि बताई। माता ने भी 21 दिनों तक विधिपूर्वक श्रीगणेश का व्रत किया। व्रत के प्रभाव के कारण 21वें दिन उनके पुत्र माता पार्वती के पास आ गए। इसी कारण से इस व्रत को स्त्रियों के लिए विशेषकर रुप से मंगलकारी माना जाता है।

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