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घर-घर विराजे विघ्नहर्ता गणेश जी, बप्पा की पूजा के लिए जानिए पूरी विधि, मंत्र और मुहूर्त

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को माता पार्वती और भगवान शंकर के पुत्र गणेश का जन्म हुआ था। उसी दिन से समस्त संसार उनका जन्मदिन मनाता है। उन्हें ये भी वरदान था कि सबसे पहले कोई भी पूजा शुभारंभ गजानन से ही होगी।

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देश भर में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को जन्में भगवान गणेश (Bal Ganesha) का उत्सव भारत के कई इलाकों में 10 दिनों तक मनाया जाएगा। घर-घर बप्पा पधार चुके हैं। आरती, कथा, मंत्र, भजन से उनका स्वागत हो रहा है। उनका पसंदीदा मोदक भोग (Modak) भी लगाया जा रहा है। इस पर्व की सबसे ज्यादा रौनक मुबंई में देखी जा रही है। हालांकि अब ये पूरे देश में बड़ा पर्व बन गया है। जानें गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, पूजन सामग्री, शुभ मुहूर्त, भोग वस्तुएं और संबंधित सारी जानकारी…

पूजन का शुभ मुहूर्त – 2 सितंबर दिन सोमवार को मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी। इस दिन पूजन का शुभ मूहर्त दोपहर 11 बजकर 4 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि दो घंटे 32 मिनट की होगी। गणेश चतुर्थी वाले दिन भगवान गणेश की पूजा मध्याह्र काल यानी दोपहर के समय में की जाती है। क्योंकि इस दिन मध्याह्र काल, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

भगवान गणेश की पूजन सामग्री – गणेश जी की पूजा के लिए गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, कलावा, जनेऊ, इलाइची, नारियल, चांदी का वर्क, सुपारी, लौंग पंचमेवा, घी, कपूर, पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा और गंगाजल इत्यादि चीजों को इकट्ठा कर लें।

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मूर्ति स्थापना की विधि – गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले एक लाल वस्त्र चौकी पर बिछाएं। फिर उस लाल वस्त्र पर अक्षत छिड़कें और उसके ऊपर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद गणेश भगवान को स्नान कराएं। रिद्धि-सिद्धि के रूप में प्रतिमा के दोनों ओर एक-एक सुपारी भी रखें।

पूजा विधि – गणेश भगवान की प्रतिमा की स्‍थापना के बाद गणेश जी को सिंदूर लगाएं। गणपति की मूर्ति के पास तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर रख लें। उस कलश को गणपति के दांई ओर रखें और उन्हें चांदी का वर्क लगाएं। इसके उपरान्त उन्हें जनेऊ, लाल पुष्‍प, दूब, मोदक, नारियल आदि सामग्री अर्पित करें। आखिरी में उनकी आरती उतारें और भोग लगाएं।

गणेश जी के मंत्र – ‘वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे दे सर्व कार्येषु सर्वदा।। मंत्र का जप करें।

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भोग सामग्री – गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यानी कि जब तक भगवान गणेश घर में रहते हैं तब तक उनका एक परिवार के सदस्‍य की तरह ध्‍यान रखा जाता है। गणपति को दिन भर में 3 बार भोग लगाना अनिवार्य होता है। वैसे गणपति को मोदक अति प्रिय होते हैं इसलिए इसका भोग लगाना चाहिए। लेकिन आप चाहें तो गणेश जी को बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं।

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