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Ganesh Aarti: ‘जय गणेश जय गणेश देवा…’भगवान गजानन की पूजा इस आरती के साथ करें संपन्न

Ganesh ji ki Aarti Songs: 'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा' (Jai Ganesh Jai Ganesh Aarti) और 'जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति, दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति, जय देव जय देव' (Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti) इन आरतियों को गाकर गणेश जी को किया जाता है प्रसन्न।

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Ganpati Aarti: गणेश जी को विदा करने का समय आ गया है। 12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2019) के दिन उनकी गणेश चतुर्थी वाले दिन लाई गई प्रतिमा का विसर्जन (Ganesh Visarjan 2019) किया जायेगा। 9 दिनों तक घर पर गणेश जी की विधिवत पूजा करने के बाद 10वें दिन उनका विसर्जन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसके बाद गणेश जी अपने घर चले जाते हैं और उनसे अगले बरस आने की कामना की जाती है। गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए पूजा के समय इन आरतियों का गान किया जाता है…

गणेश जी की आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti):

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

जय देव जय देव आरती… (jai dev jai dev jai mangal murti) :

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

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