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Sakat Chuth, Ganesh Ji Ki Aarti: जय गणेश जय गणेश देवा…भगवान गणेश की इस आरती को उतार कर सकट व्रत की पूजा करें संपन्न

Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti: आज सकट चौथ व्रत (Sakat Chauth) है। इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूजा की जाती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए इस व्रत का खास महत्व माना जाता है। आज व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान गणेश की इस आरती को उतारना न भूलें। जय गणेश जय गणेश देवा...

गणेश जी की आरती।

Ganesh Aarti: आज सकट चौथ (Sakat Chauth) व्रत है। ये व्रत हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हर साल माघ मास (Magh Mas) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ये व्रत रखा जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2020), माघी चतुर्थी, तिलकुट चौथ इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। सकट वाले दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूजा की जाती है। लेकिन भगवान गणेश की पूजा इस आरती को उतारे बिना मानी जाती है अधूरी…

गणेश जी की आरती (Ganesh Aarti): 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय…

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय…

जय देव जय देव आरती (Ganpati Aarti):

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

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