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Gajlaxmi Vrat 2019: महालक्ष्मी व्रत 21 सितंबर को हो रहा है संपन्न, इस दिन चांदी का हाथी खरीदना होता है शुभ, जानें व्रत की पूजा विधि

Mahalaxmi Ashtami Vrat 2019 (Gajlaxmi Vrat 2019 Date): जहां पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2019) में नई वस्तु खरीदने की मनाही होती है वहीं इसकी अष्टमी तिथि (Ashtami Tithi) को सोना खरीदना काफी शुभ माना जाता है। इस दिन हाथी पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा होती है। व्रत वाले दिन महालक्ष्मी की कथा (Mahalakshmi Vrat Katha) पढ़ी जाती है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 20, 2019 5:24 PM
Mahalakshmi Vrat Vidhi And Katha: इस दिन हाथी पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा होती है।

वैसे तो श्राद्ध पक्ष में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन पितृ पक्ष के 16 दिनों में से अष्टमी का दिन काफी शुभ माना जाता है। क्योंकि इस दिन को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त है। जहां पितृ पक्ष में नई वस्तु खरीदने की मनाही होती है वहीं इसकी अष्टमी तिथि को सोना खरीदना काफी शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सोना खरीदना फलदायी होता है। साथ ही इस तिथि में शादी की खरीदारी भी की जा सकती है। इस दिन हाथी पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दिन पिछले 16 दिनों से चला आ रहा महालक्ष्मी व्रत संपन्न होता है।

भाद्रपद के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से मां महालक्ष्मी की पूजा शुरू होती है जो आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक होती है। 16 दिनों तक चलने वाली इस विशेष पूजा में मां लक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की उपासना की जाती है। कई लोग इन 16 दिनों तक व्रत रखते हैं।

महालक्ष्मी व्रत कथा जानें यहां

महालक्ष्मी व्रत विधि (Mahalaxmi Vrat Vidhi) :

इस व्रत की पूजा शाम के समय होती है। इस दिन शाम को स्नान कर घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लें। फिर उस पर केसर मिले चंदन से अष्टदल बना लें और उस पटरे पर चावल रख जल कलश रखें।

– कलश के पास हल्दी से कमल बना लें और उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति विराजमान करें।

– मिट्टी का हाथी बाजार से लाकर या घर पर बनाकर उसे स्वर्णाभूषणों से सजाएं।

– अगर संभव हो तो इस दिन नया सोना खरीदकर उसे हाथी पर चढ़ाएं।

– अपनी श्रद्धानुसार सोने या चांदी का हाथी भी ला सकते हैं। इस दिन चांदी के हाथी का ज्यादा महत्व माना गया है। इसलिए अगर संभव हो तो पूजा स्थान पर चांदी के हाथी का प्रयोग करें।

– अब माना लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने श्रीयंत्र रखें और कमल के फूल से पूजन शुरू करें।

– पूजा में सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई और फल का प्रयोग करें।

21 या 22 सितंबर कब रखें जितिया व्रत

– अब माता लक्ष्मी के सभी आठ रूपों की नीचे दिये गये मंत्रों के साथ कुमकुम, अक्षत और फूल चढ़ाते हुए पूजा अर्चना करें।
– ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:
– ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:
– ॐ कामलक्ष्म्यै नम:
– ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:
– ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:
– ॐ योगलक्ष्म्यै नम:

– आखिर में घी के दीपक से पूजा कर कथा सुनें, माता लक्ष्मी की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।

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