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…इसलिए हिंदू धर्म में सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाता दाह संस्कार!

हिंदू धर्म में कुल सोलह संस्कार बताए गए हैं। इनमें से सोलहवें को अंतिम संस्कार कहा जाता है। अंतिम संस्कार व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद निभाया जाता है।

Author नई दिल्ली | November 28, 2018 7:44 PM
सांकेतिक तस्वीर। (Photo: Screenshot)

हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। आपने सुना होगा कि सूर्योदय के बाद दाह संस्कार नहीं करना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या मान्यता है? यदि नहीं तो हम आपको बताने जा रहे हैं। मालूम हो कि हिंदू धर्म में कुल सोलह संस्कार बताए गए हैं। इनमें से सोलहवें को अंतिम संस्कार कहा जाता है। अंतिम संस्कार व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद निभाया जाता है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए गरुण पुराण का विशेष महत्व है। गरुण पुराण में मानव जीवन और उसकी मृत्यु के बारे में काफी कुछ बताया गया है। मान्यता है कि गुरुण पुराण की बातों का पालन करने से मनुष्य मृत्यु के बाद नरक में जाने से बच जाता है।

गरुण पुराण में मनुष्य के अंतिम संस्कार के बारे में विस्तार बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मनुष्य की मृत्यु होने पर सूर्योदय के बाद उसका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए। इसके मुताबिक, रात में मनुष्य का दाह संस्कार करने से उसकी आत्मा को परलोक में बहुत कष्ट भोगना पड़ता है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगले जन्म में अंग दोष भी हो सकता है। यही वजह है कि सूर्योदय के बाद दाह संस्कार के लिए मना किया जाता है।

गरुण पुराण में यह भी कहा गया है कि पार्थिव शरीर का सिर चिता पर सदैव दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। दरअसल दक्षिण को मृत्यु के देवता यमराज की दिशा माना गया है। ऐसे में पार्थिव शरीर का सिर चिता पर दक्षिण दिशा में रखने से वह यमराज को समर्पित हो जाता है। इससे यमराज उस पार्थिव शरीर को आसानी से स्वीकार लेते हैं। और मृतात्मा को परलोक में अधिक कष्ट नहीं भोगना पड़ता।

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