Falgun Amavasya 2026 Tulsi Puja: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, साल में कुल 12 अमावस्या तिथि पड़ती है। ऐसे ही फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। मंगलवार के दिन पड़ने कारण इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। जो स्नान-दान, तर्पण और विष्णु पूजा के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि को पीपल के वृक्ष की पूजा अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इसमें विष्णु जी की वास होता है। इसके अलावा इस दिन तुलसी जी के साथ शालिग्राम भगवान की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं फाल्गुन अमावस्या पर कैसे करें तुलसी और शालिग्राम की पूजा। इसके साथ ही जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त…
फाल्गुन अमावस्या कब है? (Falgun Amavasya 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 पर आरंभ हो रही है, जो 17 फरवरी को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर होगा समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से भौमवती अनावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को है।
फाल्गुन अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त (Falgun Amavasya 2026 Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 5:00 से 5:55 बजे तक
स्नान-दान का समय: सुबह से सूर्यास्त तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर करीब 12:10 से 12:55 बजे तक
फाल्गुन अमावस्या पर करें तुलसी-शालिग्राम पूजा
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर तुलसी-शालिग्राम पूजा करने का विशेष महत्व है।
- फाल्गुन अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या फिर घर पर ही नहाने वाले पानी में थोड़ा सा गंगाजल डाल लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें।
- अब भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें।
- फिर तुलसी जी और शालिग्राम की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले शालिग्राम का दूध व जल से अभिषेक करें।
- तुलसी माता को जल चढ़ाएं और लाल चुनरी अर्पित करें।
- इसके बाद तुलसी माता और शालिग्राम को फूल-माला चढ़ाएं।
- पीला चंदन शालिग्राम जी को और तुलसी को सिंदूर लगाएं।
- इसके बाद मिठाई, फल आदि का भोग लगाने के साथ तुलसी दल चढ़ाएं।
- अब घी का दीपक और धूप जला लें।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या तुलसी स्तुति का पाठ करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद बांट दें।
- जो श्रद्धा से इस दिन पूजन, तर्पण और दान करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति हो सकती है।
करें पीपल के पेड़ की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना गया है। ऐसे में फाल्गुन अमावस्या को एक लोटे में जल, गंगाजल, कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर पीपल को अर्पित करें।
करें इन मंत्रों का जाप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ तुलस्यै नमः
तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti)
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता.
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता.. मैय्या जय तुलसी माता..
सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर.
रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता. मैय्या जय तुलसी माता..
बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या.
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता. मैय्या जय तुलसी माता..
हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित.
पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता. मैय्या जय तुलसी माता..
लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में.
मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता। मैय्या जय तुलसी माता..
हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी.
प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता. मैय्या जय तुलसी माता..
हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता.
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता..
शालिग्राम जी की आरती (Shaligram Ki Aarti)
शालिग्राम सुनो विनती मेरी.
यह वरदान दयाकर पाऊं..
प्रात: समय उठी मंजन करके.
प्रेम सहित स्नान कराऊँ..
चन्दन धूप दीप तुलसीदल.
वरन-वरण के पुष्प चढ़ाऊँ..
तुम्हरे सामने नृत्य करूँ नित.
प्रभु घंटा शंख मृदंग बजाऊं..
चरण धोय चरणामृत लेकर.
कुटुंब सहित बैकुण्ठ सिधारूं..
जो कुछ रुखा सूखा घर में.
भोग लगाकर भोजन पाऊं..
मन वचन कर्म से पाप किये.
जो परिक्रमा के साथ बहाऊँ..
ऐसी कृपा करो मुझ पर.
जम के द्वारे जाने न पाऊं..
माधोदास की विनती यही है.
हरी दासन को दास कहाऊं..
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। स्नान-दान के सटीक मुहूर्त आपके रहने वाले स्थान के अनुसार कुछ मिनट कम या ज्यादा हो सकते हैं। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
